प्रेस के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा है उस पर हर मीडिया संस्थान को आत्मचिंतन करना चाहिए
Currentaffairs प्रेस के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा है उस पर हर मीडिया संस्थान को आत्मचिंतन करना चाहिए

प्रेस के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा है उस पर हर मीडिया संस्थान को आत्मचिंतन करना चाहिए उच्चतम न्यायालय ने टीवी समाचार सामग्री पर नियामकीय नियंत्रण की कमी पर अफसोस जताते हुए नफरत फैलाने वाले भाषण को 'बड़ा खतरा' बताया है। देखा जाये तो टीआरपी की प्रतिस्पर्धा में चैनल जिस तरह का कंटेंट परोस रहे हैं उससे हाल के समय में समाज में बड़े विवाद भी खड़े हुए हैं। मगर सरकार के लिए मुश्किल यह है कि जैसे ही वह मीडिया को सुझाव या निर्देश जारी करती है उस पर मीडिया की स्वतंत्रता को बाधित करने का आरोप लग जाता है। ऐसे में अदालत को ही 'स्वतंत्र और संतुलित प्रेस' के लिए कोई कदम उठाना होगा।

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India के सबसे विश्वस्त पड़ोसी भूटान पर डोरे डाल रहा है चीन, क्या डोकलाम को हासिल करने में सफल होगा ड्रैगन?
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साक्षात्कारः पूर्व आईपीएस प्रकाश सिंह ने कंझावला कांड को लेकर पुलिस पर उठाये बड़े सवाल
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साक्षात्कारः पूर्व आईपीएस प्रकाश सिंह ने कंझावला कांड को लेकर पुलिस पर उठाये बड़े सवाल दिल्लीवासियों ने कंझावला केस के बाद आधुनिक तकनीकों से लैस व सपन्न कही जाने वाली दिल्ली पुलिस की सुरक्षा पर सीधा सवाल खड़ा किया है, करना भी चाहिए घटनाएं जो लगातार बढ़ रही हैं। ऐसा लगता है जैसे बढ़ती वारदातों पर उनका प्रभावी नियंत्रण रहा ही ना हो। 12 किलोमीटर तक एक लड़की को घसीटा जाता है, पर किसी पुलिसकर्मी की नजर नहीं पड़ती। अगर सतर्कता होती तो लड़की की जान बच सकती थी। दिल्ली पुलिस का मॉनिटरिंग सिस्टम पूरी तरह से चरमरा-सा गया है। क्या-क्या हैं मौजूदा समय में कमियां और क्या कुछ ऐसा किया जाए जिससे पुलिस की सुरक्षा फिरसे दुरूस्त हो, जैसे ज्वलंत मुद्दे पर पूर्व वरिष्ठ आईपीएस प्रकाश सिंह से रमेश ठाकुर की विस्तृत बातचीत।

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Swami Vivekananda ने अध्यात्म के बल पर भारत को विश्व गुरु बनाने के किए थे प्रयास
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Swami Vivekananda ने अध्यात्म के बल पर भारत को विश्व गुरु बनाने के किए थे प्रयास स्वामी विवेकानन्द जी का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकत्ता में हुआ था। आपका बचपन का नाम श्री नरेंद्र नाथ दत्त था। बचपन से ही आपका झुकाव आध्यात्म की ओर था। आपने श्री रामकृष्ण परमहंस से दीक्षा ली थी एवं अपने गुरु जी से बहुत अधिक प्रभावित थे। आपने बचपन में ही अपने गुरु जी से यह सीख लिया था कि सारे जीवों में स्वयं परमात्मा का अस्तित्व है अतः जरूरतमंदों की मदद एवं जन सेवा द्वारा भी परमात्मा की सेवा की जा सकती है। अपने गुरुदेव श्री रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु के पश्चात स्वामी विवेकानंद जी ने  भारतीय उपमहाद्वीप के देशों में विचरण, यह ज्ञान हासिल करने के उद्देश्य से, किया था कि ब्रिटिश शासनकाल में इन देशों में निवास कर रहे लोगों की स्थिति कैसी है। कालांतर में वे स्वयं वेदांत के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु बन गए थे। आपको वर्ष 1893 में शिकागो, अमेरिका में आयोजित की जा रही विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला था। विश्व धर्म महासभा में स्वामी विवेकानंद जी को अपनी बात रखने के लिए केवल दो मिनट का समय दिया गया था परंतु उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत ही “मेरे अमेरिकी बहनों एवं भाईयों” कहकर की थी, इस सम्बोधन से प्रभावित होकर समस्त उपस्थित प्रतिनिधियों ने खड़े होकर बहुत देर तक तालियों की गड़गड़ाहट की बीच स्वामी विवेकानंद जी का अभिवादन किया था। स्वामी विवेकानंद जी के इस प्रथम वाक्य ने ही वहां उपस्थित सभी प्रतिनिधियों का दिल जीत लिया था।      स्वामी विवेकानंद जी का मूल स्वभाव राष्ट्र के प्रति समर्पित भावना से ओतप्रोत था। आपने राष्ट्रीय भाव में आध्यात्मिक एवं धर्म को जोड़कर इसे धारदार बनाने के प्रयास किया था। आपका मजबूत विचार था भारत को अपने आध्यात्म एवं धर्म के बल पर पश्चिम को पुनः जीतना ही होगा। आपका यह प्रबल विश्वास था कि भविष्य में धर्म ही भारत का मेरुदंड बनेगा। इस प्रकार आप भारत के अतीत का आह्वान कर भविष्य के भारत का निर्माण करना चाहते थे। आप भारत राष्ट्र की महत्ता एवं एकता के पोषक थे। आपके द्वारा राष्ट्रीय उन्नति एवं जागरण के लिए दिया गया सशक्त वक्तव्य आज भी भारतीयों के लिए प्रेरणदायक है। स्वामी विवेकानंद जी कहा करते थे कि हम राष्ट्र के रूप में अपना व्यक्तित्व विस्मृत कर बैठे हैं, और यही इस देश में सब दुष्कर्मों की जड़ है। हमें देश को उसका खोया हुआ व्यक्तित्व वापस लौटाना ही होगा और फिर जनता का उत्थान करना होगा। प्रत्येक देश में जो बुराईयां देखने को मिलती हैं वे धर्म के कारण नहीं है बल्कि धर्मद्रोह के कारण हैं, इसलिए दोष धर्म का नहीं है बल्कि हम मनुष्यों का है। स्वामी विवेकानंद जी मानव की अंतः प्रकृति को उसकी बाह्य प्रकृति से अधिक महत्वपूर्ण मानते थे। आप कहा करते थे कि मानव रुपया बनाता है, रुपया मानव नहीं बनाता अतः मनुष्य का सारा सुख उसके नैतिक और आध्यात्मिक जीवन पर निर्भर है। यदि मानव जीवन इस तत्व से विहीन है तो किसी भी तरह की राजनीतिक या आर्थिक व्यवस्था, किसी भी तरह का समाज, किसी भी तरह की विश्व व्यवस्था, किसी भी तरह की वैज्ञानिक तथा तकनीकी ज्ञान में वृद्धि और कितना भी सम्पन्न भौतिक जीवन उसे सुख नहीं पहुंचा सकता।इसे भी पढ़ें: National Youth Day: युग परिवर्तन का वाहक है युवास्वामी दयानंद की भांति स्वामी विवेकानंद जी भी भारतीय समाज की रूढ़ियों को तोड़ने और सामाजिक परिवर्तन के इच्छुक थे। समाज में निवास करने वाले समस्त व्यक्तियों को सामाजिक समानता मिलनी चाहिए क्योंकि प्रत्येक मानव में आत्मा एक ही है जो कि परम ब्रह्म का स्वरूप है। सामाजिक समानता का अभिप्राय यह नहीं है कि समाज में सब वर्गों व वर्णों को समाप्त कर दिया जाए और उसके स्थान पर एक ही वर्ग हो। वर्ग और वर्ण तो बने रहेंगे क्योंकि ये समाज के आवश्यक अंग हैं। इनका विकास और निर्माण सामाजिक आवश्यकताओं के परिणामस्वरूप हुआ है। परंतु, अन्य समस्त वर्णों के मध्य असमानता को किसी भी स्तर में स्वीकार नहीं किया जाएगा। समाज को विभिन्न वर्गों के मध्य संघर्ष का अखाड़ा न बनाया जाए न तो किसी वर्ग को उच्च समझा जाए और न ही निम्न। बल्कि हर एक वर्ग और वर्ण को अपने कर्तव्य पूरे करने चाहिए। मानव जीवन की श्रेष्ठता त्याग और बलिदान में हैं, स्वार्थ सिद्धि में नहीं। इसलिए वर्गों के मध्य संघर्ष न होकर सामंजस्य होना चाहिए।  स्वामीजी के उक्त विचार कार्ल मार्क्स के विचारों के विपरीत हैं। मार्क्स ने समाज में वर्ग के संघर्ष को स्वाभाविक माना है। जितना तीव्र यह संघर्ष होगा उतना ही शीघ्र समाज में परिवर्तन आएगा, इस परिवर्तन को शीघ्र लाने के लिए क्रांति द्वारा सर्वहारा वर्ग को पूंजीपति वर्ग के विरुद्ध संघर्ष करना होगा। इसके विपरीत स्वामी विवेकानंद जी समाज में क्रांतिकारी परिवर्तनों के विरुद्ध हैं। अरस्तू की भांति वे स्वीकार करते हैं कि समाज जो कुछ भी अपनाता है, आवश्यकता के कारण अपनाता है। अगर उसको क्रांति द्वारा बदल दिया जाए तो तनाव उत्पन्न होगा। इस तनाव में लाभ के स्थान पर हानि अधिक होगी। भारतीय समाज में तो यह बात और भी अधिक लागू होती है।    स्वामी विवेकानंद जी अपने ओजस्वी व्याख्यानों में बार बार यह आह्वान करते थे कि उठो जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता। उनके ये वाक्य उनके श्रोताओं को बहुत प्रेरणा देते थे। उनका यह भी कहना होता था कि हर आत्मा ईश्वर से जुड़ी है अतः हमें  अपने अंतर्मन एवं बाहरी स्वभाव को सुधारकर अपनी आत्मा की दिव्यता को पहचानना चाहिए।  कर्म, पूजा, अंतर्मन अथवा जीवन दर्शन के माध्यम से ऐसा किया जा सकता है। जीवन में सफलता के राज खोलते हुए आप कहते थे कि कोई भी एक विचार लेकर उसे अपने जीवन का लक्ष्य बनायें एवं उसी विचार के बारे में सदैव सोचें, केवल उसी विचार का सपना देखते रहें और उसी विचार में ही जीयें। यही आपकी सफलता का रास्ता बन सकता है। आपके दिल, दिमाग और रगों में केवल यही विचार भर जाना चाहिए। इसी प्रकार ही आध्यात्मिक सफलता भी अर्जित की जा सकती है।  स्वामी विवेकानंद जी ने अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोपीयन देशों में  कई निजी एवं सार्वजनिक व्याख्यानों का आयोजन कर महान हिन्दू संस्कृति के सिद्धांतों का प्रचार प्रसार किया एवं उसे सार्वभौमिक पहचान दिलवाई। भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदांत दर्शन विश्व के कई देशों में स्वामी विवेकानंद जी द्वारा उस समय किए गए प्रसार की कड़ी के माध्यम से ही पहुंच सका है। केवल 39 वर्ष की आयु में दिनांक 4 जुलाई 1902 को स्वामी विवेकानंद जी ने सदगदी प्राप्त की थी। भारत में आज स्वामी विवेकानंद जी को एक देशभक्त सन्यासी के रूप में जाना जाता है और उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। केवल 39 वर्ष के अपने जीवनकाल में स्वामी विवेकानंद जी ने देश के लिए किए जो कार्य किए, वे कार्य आने वाली शताब्दियों तक भारत में याद किए जाते रहेंगे। परम पूज्य गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने एक बार कहा था कि "

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कार्यस्थल पर बढ़ती उत्पीड़न की घटनाओं से शर्मसार हो रही है मानवता
Currentaffairs कार्यस्थल पर बढ़ती उत्पीड़न की घटनाओं से शर्मसार हो रही है मानवता

कार्यस्थल पर बढ़ती उत्पीड़न की घटनाओं से शर्मसार हो रही है मानवता हम चाहे अपने आप को कितने ही अत्याधुनिक, संवेदनशील और मानवतावादी मानें पर जो आंकड़े सामने आ रहे हैं वह अत्यंत दुर्भायजनक होने के साथ ही मानवता के लिए शर्मनाक भी हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के देशों में हर पांच में से एक नौकरीपेशा किसी ना किसी रूप से कार्यस्थल पर उत्पीड़न का शिकार हो रहा है। इसमें भी अपने आप को सबसे अधिक सभ्य और अत्याधुनिक मानने वाला अमेरिका दुनिया के देशों में अव्वल है। दूसरी बड़ी बात यह भी है कि उत्पीड़ित नौकरीपेशा में कोई अधिक लैंगिक भेदभाव भी नहीं है। इसमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं। 2021 के आंकड़ों के आधार पर जारी रिपोर्ट में 4 करोड़ 30 लाख लोग उत्पीड़न के शिकार पाये गये हैं। यह नौकरीपेशा लोगों के प्राप्त आंकड़ों के अनुसार करीब 22 फीसदी से कुछ अधिक ही होते हैं।

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2022 के दस सबसे प्रचलित शब्दों ने दुनिया को भावी घटनाओं के संकेत भी दिये हैं
Currentaffairs 2022 के दस सबसे प्रचलित शब्दों ने दुनिया को भावी घटनाओं के संकेत भी दिये हैं

2022 के दस सबसे प्रचलित शब्दों ने दुनिया को भावी घटनाओं के संकेत भी दिये हैं विश्व की प्रमुख डिक्शनरियों द्वारा जारी किए जाने वाले प्रमुख शब्द दुनिया की हकीकत बयां करने के लिए काफी होते हैं। इसको साल के पहले नंबर के एक शब्द से ही नहीं आंका जा सकता बल्कि साल के अन्य शब्दों को भी देखने से साफ हो जाता है कि दुनिया जा किधर रही हैं। लोगों में क्या हलचल है। सकारात्मकता या नकारात्मकता कहां तक पहुंच रही हैं तो भावी के लिए भी संदेश छिपा होता है। साल 2022 का प्रमुख शब्द गैसलाइटिंग हो या पर्माक्राइसिस या कीव हो या पार्टीगेट, कोविड हो या वार्महाउस यह सभी शब्द जो प्रमुख डिक्शनरियों द्वारा साल के शब्दों के रूप में चयनित किए गए हैं, लगभग सभी वैश्विक संकट की और इशारा कर रहे हैं।

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अर्थव्यवस्था में सुधार के चलते फलने फूलने लग गये हैं भारतीय बैंक
Currentaffairs अर्थव्यवस्था में सुधार के चलते फलने फूलने लग गये हैं भारतीय बैंक

अर्थव्यवस्था में सुधार के चलते फलने फूलने लग गये हैं भारतीय बैंक वैश्विक स्तर पर कई विकसित देशों में मुद्रास्फीति में हो रही लगातार वृद्धि एवं इन देशों द्वारा ब्याज दरों में लगातार की जा रही वृद्धि के कारण इन देशों में आने वाली सम्भावित मंदी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने 26वां वित्तीय स्थिरता प्रतिवेदन 29 दिसम्बर 2022 को जारी किया। इस प्रतिवेदन में भारतीय बैंकों की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ बताई गई है। केंद्र सरकार द्वारा लिए गए कई आर्थिक निर्णयों के चलते देश में न केवल आर्थिक गतिविधियों में तेजी से सुधार होता दिख रहा है बल्कि वित्तीय स्थिरिता की स्थिति में भी लगातार सुधार दृष्टिगोचर है। दरअसल, बैंकिंग उद्योग किसी भी देश में अर्थ जगत की रीढ़ माना जाता है। बैंकिंग उद्योग में आ रही परेशानियों का निदान यदि समय पर नहीं किया जाता है तो आगे चलकर यह समस्या उस देश के अन्य उद्योगों को प्रभावित कर, उस देश के आर्थिक विकास की गति को कम कर सकती है। इसलिए पिछले 8 वर्षों के दौरान केंद्र सरकार ने बैंकों की लगभग हर तरह की समस्याओं के समाधान हेतु कई ईमानदार प्रयास किए हैं। गैरनिष्पादनकारी आस्तियों से निपटने के लिए दिवाला एवं दिवालियापन संहिता लागू की गई है। देश में सही ब्याज दरों को लागू करने के उद्देश्य से मौद्रिक नीति समिति बनायी गई है। साथ ही, केंद्र सरकार ने इंद्रधनुष योजना को लागू करते हुए, सरकारी क्षेत्र के बैंकों को 3.

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अनिवासी भारतीयों के योगदान को सराहने का अवसर भी है प्रवासी भारतीय दिवस
Currentaffairs अनिवासी भारतीयों के योगदान को सराहने का अवसर भी है प्रवासी भारतीय दिवस

अनिवासी भारतीयों के योगदान को सराहने का अवसर भी है प्रवासी भारतीय दिवस प्रत्येक वर्ष 9 जनवरी को भारत में प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है। भारत के आर्थिक विकास में प्रवासी भारतीयों के अमूल्य योगदान को इस दिन विशेष रूप से याद किया जाता है। इस वर्ष भी इस शुभ अवसर पर दिनांक 8 जनवरी से 10 जनवरी 2023 तक मध्य प्रदेश के इंदौर नगर में 17वां प्रवासी भारतीय दिवस समारोह आयोजित किया गया है। इस विशेष आयोजन में प्रथम दिन, अर्थात 8 जनवरी 2023 को यूथ प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाएगा। दूसरे दिन, अर्थात 9 जनवरी 2023 को 17वां प्रवासी भारतीय दिवस कन्वेंशन 2023 का शुभारंभ होगा और तीसरे दिन, अर्थात 10 जनवरी 2023 को 17वें प्रवासी भारतीय दिवस कन्वेंशन का समापन होगा। उक्त कार्यक्रमों में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू की भी भागीदारी रहेगी।  आज पूरे विश्व में 3.

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Charlie Hebdo ने कार्टून ने फिर मचाया बवाल, सर्वोच्च नेता ख़ामेनेई का मजाक उड़ाये जाने से ईरान हुआ लाल
Currentaffairs Charlie Hebdo ने कार्टून ने फिर मचाया बवाल, सर्वोच्च नेता ख़ामेनेई का मजाक उड़ाये जाने से ईरान हुआ लाल

Charlie Hebdo ने कार्टून ने फिर मचाया बवाल, सर्वोच्च नेता ख़ामेनेई का मजाक उड़ाये जाने से ईरान हुआ लाल फ्रांस की व्यंग्य पत्रिका शार्ली हेब्दो एक बार फिर सुर्खियों में है क्योंकि इसमें छपे कार्टून ने इस बार ईरान में तहलका मचा दिया है। इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता भी दिख रहा है लेकिन पत्रिका शार्ली हेब्दो ने कहा है कि उसे अपने कार्टून पर कोई पछतावा नहीं है। इस विवाद के बाद फ्रांस की सरकार ने पूर्व के अनुभवों से सबक लेते हुए अराजक तत्वों पर कड़ी नजर रखनी भी शुरू कर दी है। विस्तृत घटनाक्रम की बात करें तो हम आपको बता दें कि शार्ली हेब्दो पत्रिका ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह सय्यद अली होसैनी ख़ामेनेई का मजाक उड़ाया तो गुस्साये ईरान ने फ्रांस के राजदूत को तलब कर अपनी सख्त नाराजगी का इज़हार कर डाला है। इसके साथ ही ईरान ने दशकों पुराने एक फ्रांसीसी शोध संस्थान को बंद करने का फरमान भी सुना डाला है। इस संबंध में ईरान के विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान भी आ गया है जिसमें कहा गया है कि शार्ली हेब्दो में प्रकाशित कार्टून के विरोध में फ्रांसीसी संस्थान को बंद कर दिया गया है।

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उत्तर प्रदेश में मुस्लिम बाहुल्य इलाकों से राहुल की यात्रा का गुजरना संयोग है या प्रयोग
Currentaffairs उत्तर प्रदेश में मुस्लिम बाहुल्य इलाकों से राहुल की यात्रा का गुजरना संयोग है या प्रयोग

उत्तर प्रदेश में मुस्लिम बाहुल्य इलाकों से राहुल की यात्रा का गुजरना संयोग है या प्रयोग कांग्रेस के सांसद और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा उत्तर प्रदेश से निकल चुकी है। यहां यह यात्रा करीब तीन दिनों तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रही। आश्चर्य की बात यह है कि 80 लोकसभा सीटों वाले इस राज्य में राहुल की यात्रा महज ढाई दिन ही रही। वह 130 किमी चले और तीन लोकसभा एवं 11 विधानसभा सीटों को कवर किया। ये वो सीटें हैं, जहां कांग्रेस का पिछले दो विधानसभा चुनावों (2017 और 2022) में खाता तक नहीं खुला है। इसके अलावा इन सीटों की खासियत यह भी है कि यह मुस्लिम-जाट, किसान और दलित बाहुल्य हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस इन सीटों पर अपनी जमानत तक नहीं बच पाई थी। ऐसे में सवाल खड़े होते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल विपक्ष का चेहरा कैसे बन पाएंगे?

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लगता है भारतीय दवा कारोबार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के लिए कोई विदेशी षड्यंत्र चल रहा है
Currentaffairs लगता है भारतीय दवा कारोबार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के लिए कोई विदेशी षड्यंत्र चल रहा है

लगता है भारतीय दवा कारोबार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के लिए कोई विदेशी षड्यंत्र चल रहा है गांबिया और उज़्बेकिस्तान में भारत में बने कफ़ सिरप को लेकर सवाल खड़े होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी ड्रग इंस्पेक्टरों को कफ़ सिरप पर निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। किंतु गांबिया और उज़्बेकिस्तान में कफ सिरप से मौत की खबरों से भारत के दवाई बाजार और उसकी प्रतिष्ठा को बड़ा धक्का लगा है। भारतीय कफ सिरप से मौत की सूचनाएं आने के बाद भारत ने अपने स्तर से जांच शुरू करा दी। किंतु यह भी जांच का विषय है कि कहीं यह विदेशी बाजार में भारतीय दवाइयों की बढ़ती साख और प्रतिष्ठा को खत्म करने का कोई अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र तो नहीं है।  उज्बेकिस्तान सरकार ने आरोप लगाया है कि भारत में बना कफ सिरप देने की वजह से उनके देश में 18 बच्चों की मौत हुई। उज्बेक हेल्थ मिनिस्ट्री ने हाल में कहा कि नोएडा के मेरियन बायोटेक में बना कफ सिरप डोक−1 मैक्स (DOK-1 MAX) पीने से बच्चों की जान गई। उधर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) जांच में उज्बेकिस्तान सरकार का सहयोग करेगा। भारत ने भी उज्बेक सरकार के आरोपों की अपने स्तर से जांच का फैसला किया है। फैक्ट्री को सील कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी ज़िलों में थोक एवं फुटकर विक्रेताओं के यहां से नियमानुसार कफ़ सिरप के सैंपल लेने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी कंपनी के कफ़ सिरप मानक के अनुसार न हों तो सुधार करवाया जा सके।

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2024 में मोदी को फिर PM बनाने के लिए अमित शाह ने कसी कमर, हारी हुई 160 सीटों को जीतने के लिए राजनीति के चाणक्य ने बनाई रणनीति
Currentaffairs 2024 में मोदी को फिर PM बनाने के लिए अमित शाह ने कसी कमर, हारी हुई 160 सीटों को जीतने के लिए राजनीति के चाणक्य ने बनाई रणनीति

2024 में मोदी को फिर PM बनाने के लिए अमित शाह ने कसी कमर, हारी हुई 160 सीटों को जीतने के लिए राजनीति के चाणक्य ने बनाई रणनीति अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है और इसके लिए मोर्चा खुद गृहमंत्री अमित शाह ने संभाल लिया है। 2019 में अमित शाह के पार्टी अध्यक्ष रहते हुए ही भाजपा ने लोकसभा चुनावों में अकेले दम पर 303 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया था। इस बार अमित शाह उन लोकसभा सीटों पर खास ध्यान लगाये हुए हैं जहां भाजपा ने 2014 में चुनाव जीता लेकिन 2019 में हार गयी थी। अमित शाह की नजरें उन सीटों पर भी लगी हुई हैं जहां भाजपा बहुत कम मतों के अंतर से 2019 में लोकसभा चुनाव हार गयी थी। बताया जा रहा है कि ऐसी सीटों की कुल संख्या 160 है और इन सभी सीटों पर माहौल को भांपने के लिए अमित शाह 11 राज्यों का सघन दौरा करने जा रहे हैं ताकि चुनावी तैयारियों को मजबूत किया जा सके।

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सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों से वसूली के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कानून की जरूरत
Currentaffairs सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों से वसूली के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कानून की जरूरत

सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों से वसूली के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कानून की जरूरत उत्तर प्रदेश के अमरोहा में सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान पहुंचाने पर उत्तर प्रदेश लोक तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली दावा न्यायाधिकरण मेरठ ने पहली बार दंगा के मामले में 86 लोगों को सजा दी है। प्राधिकरण ने नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएए) के विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में 4.

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जल-संकट और पर्यावरण पर मोहन भागवत का सीधा संवाद
Currentaffairs जल-संकट और पर्यावरण पर मोहन भागवत का सीधा संवाद

जल-संकट और पर्यावरण पर मोहन भागवत का सीधा संवाद जल प्रदूषण एवं पीने के स्वच्छ जल की निरन्तर घटती मात्रा को लेकर बड़े खतरे खड़े हैं। धरती पर जीवन के लिये जल सबसे जरूरी वस्तु है, जल है तो जीवन है। जल ही किसी भी प्रकार के जीवन और उसके अस्तित्व को संभव बनाता है। जीव मंडल में पारिस्थितिकी संतुलन को यह बनाये रखता है। पीने, नहाने, ऊर्जा उत्पादन, फसलों की सिंचाई, सीवेज के निपटान, उत्पादन प्रक्रिया आदि बहुत उद्देश्यों को पूरा करने के लिये स्वच्छ जल बहुत जरूरी है। जल-संकट के प्रति सचेत करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर-संघचालक डॉ.

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काम करो बुद्धि से, जीवन जियो शुद्धि से…हीरा बा के यह अनमोल वचन सबको जीवन में अपनाने चाहिए
Currentaffairs काम करो बुद्धि से, जीवन जियो शुद्धि से…हीरा बा के यह अनमोल वचन सबको जीवन में अपनाने चाहिए

काम करो बुद्धि से, जीवन जियो शुद्धि से…हीरा बा के यह अनमोल वचन सबको जीवन में अपनाने चाहिए मातृ वियोग से बढ़कर कोई दुख नहीं होता। किसी भी पुत्र या पुत्री के जीवन में सबसे कठिन क्षण अपनी माता या पिता को कंधा देना होता है। जिन माता पिता के कंधों पर बैठ कर बच्चा दुनिया देखता है, जब उनका साथ छूटता है तो उससे बड़ा कोई गम नहीं होता।

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विकसित देशों की नागरिकता ले रहे कुछ भारतीय, देश की आर्थिक प्रगति को ही दर्शा रहे हैं
Currentaffairs विकसित देशों की नागरिकता ले रहे कुछ भारतीय, देश की आर्थिक प्रगति को ही दर्शा रहे हैं

विकसित देशों की नागरिकता ले रहे कुछ भारतीय, देश की आर्थिक प्रगति को ही दर्शा रहे हैं केंद्र सरकार ने दिनांक 9 दिसम्बर 2022 को भारतीय संसद को सूचित किया कि वर्ष 2011 से 31 अक्टूबर 2022 तक 16 लाख भारतीयों ने अन्य देशों, विशेष रूप से विकसित देशों, की नागरिकता प्राप्त कर ली है। इसकी वर्षवार जानकारी भी प्रदान की गई है- वर्ष 2011 में 122,819 भारतीयों ने अन्य देशों की नागरिकता प्राप्त की थी, इसी प्रकार वर्ष 2012 में 120,923 भारतीय; वर्ष 2013 में 131,405 भारतीय; वर्ष 2014 में 129,328 भारतीय; वर्ष 2015 में 131,489 भारतीय; वर्ष 2016 में 141,603 भारतीय; वर्ष 2017 में 133,049 भारतीय; वर्ष 2018 में 134,561 भारतीय; वर्ष 2019 में 144,017 भारतीय; वर्ष 2020 में 85,256 भारतीय; वर्ष 2021 में 163,370 भारतीय एवं वर्ष 2022 में (31 अक्टूबर तक) 183,741 भारतीयों ने अन्य देशों की नागरिकता प्राप्त की। वर्ष 2011 से यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है केवल वर्ष 2020 को छोड़कर, क्योंकि इस वर्ष कोरोना महामारी ने पूरे विश्व को अपनी जकड़ में ले लिया था।  जिन भारतीयों ने हाल ही के वर्षों में अन्य देशों में नागरिकता प्राप्त की है, उनमें से अधिकतम भारतीयों ने अमेरिका में नागरिकता प्राप्त करने के उपरांत भारतीय नागरिकता छोड़ी है। वर्ष 2021 में 78,284 भारतीयों ने अमेरिकी नागरिकता प्राप्त की जो वर्ष 2020 में 30,828 भारतीयों द्वारा अमेरिकी नागरिकता प्राप्त की गई संख्या से बहुत अधिक है।  भारतीय किन कारणों के चलते अन्य देशों में नागरिकता प्राप्त कर रहे हैं, इस विषय पर विचार करने पर ध्यान में आता है कि इसके पीछे दरअसल कई आर्थिक कारण ही जिम्मेदार हैं। सबसे पहिले तो भारत में लगातार तेजी से हो रहे आर्थिक विकास के चलते कई भारतीय अन्य देशों में अपना व्यवसाय फैला रहे हैं, इस व्यवसाय की देखभाल करने के उद्देश्य से कई भारतीय परिवार अपने कुछ सदस्यों को अन्य देशों विशेष रूप से विकसित देशों में नागरिकता प्रदान करवा रहे हैं। क्योंकि वर्तमान में जारी नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति केवल एक देश की नागरिकता प्राप्त कर सकता है। यदि किसी व्यक्ति ने अमेरिकी नागरिकता प्राप्त कर ली है तो उसे भारतीय नागरिकता छोड़नी होगी। दूसरे, विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी जैसे तकनीकी क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त भारतीय नौजवानों को रोजगार के अधिकतम अवसर विकसित देशों में ही उपलब्ध हो रहे हैं, और इन देशों में वेतन भी भारत की तुलना में बहुत अधिक प्राप्त होता है। आज अमेरिका में भारतीय मूल के नागरिक जो उच्च शिक्षा एवं उच्च कौशल वाले क्षेत्रों में कार्यरत हैं उनका औसत वेतन प्रतिवर्ष 125,000 डॉलर से अधिक है जबकि अमेरिका में निवास कर रहे नागरिकों का औसत वेतन प्रतिवर्ष लगभग 70,000 डॉलर के आसपास है। एक तो नौकरियों की अधिक उपलब्धता दूसरे बहुत अधिक वेतन, ये बहुत महत्वपूर्ण कारक हैं जो उच्च शिक्षा प्राप्त भारतीयों को अन्य देशों में रोजगार प्राप्त करने हेतु आकर्षित कर रहे हैं। तीसरे, कई विकसित देशों ने अन्य देशों के नागरिकों को शीघ्रता से नागरिकता प्रदान करने के उद्देश्य से विशेष निवेश योजनाएं चला रखी हैं। इन योजनाओं के अंतर्गत यदि कोई विदेशी नागरिक इन देशों में एक पूर्व निर्धारित राशि का निवेश करता है एवं पूर्व निर्धारित संख्या में रोजगार के नए अवसर उस देश में निर्मित करता है तो उसे उस देश की नागरिकता ‘गोल्डन वीजा रूट’ के अंतर्गत शीघ्रता से प्रदान कर दी जाती है। इसी कारण के चलते भी कई भारतीय इन देशों में अपनी बहुत बड़ी राशि का निवेश कर रहे हैं एवं इस चैनल के माध्यम से इन विकसित देशों की नागरिकता प्राप्त कर रहे हैं। वर्ष 2021 में इंग्लैंड में ‘गोल्डन वीजा रूट’ के माध्यम से बसने हेतु प्राप्त की जाने वाली जानकारी प्राप्त करने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या वर्ष 2021 में 54 प्रतिशत बढ़ गई। अब तो इस प्रकार की योजनाएं यूरोपीय देश, पुर्तगाल, माल्टा, ग्रीस, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड आदि भी लागू कर भारतीयों को अपने अपने देशों में आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: विदेश में रह रहे भारतीय मूल के नागरिक भारत के आर्थिक विकास को गति देने में दे रहे अपना योगदानचूंकि भारत आर्थिक क्षेत्र में पिछले लगभग 8-9 वर्षों से लगातार तेजी से विकास कर रहा है, अतः पूरे विश्व के लिए एक आकर्षण का क्षेत्र बना हुआ है। भारत में विदेशी निवेश बहुत तेज गति से बढ़ रहा है एवं कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत में अपनी औद्योगिक एवं विनिर्माण इकाईयों की लगातार स्थापना कर रही हैं, इससे कई भारतीयों ने भी आर्थिक क्षेत्र में अकल्पनीय तरक्की हासिल की है जिसके चलते कई भारतीय अपनी व्यावसायिक इकाईयों को अन्य देशों विशेष रूप से विकसित देशों में भी स्थापित कर अपने व्यवसाय को वैश्विक स्तर पर फैलाना चाहते हैं इसलिए यह देश इस वर्ग को एक आकर्षण के रूप में दिखाई दे रहे हैं। वैसे भी अब पूरा विश्व ही एक तरह से वैश्विक गांव का रूप ले चुका है।             देश में लगातार तेज गति से हो रहे आर्थिक विकास के चलते कई भारतीयों की आर्थिक स्थिति में इतना अधिक सुधार हुआ है कि वे सपरिवार कई विकसित देशों की, पर्यटन की दृष्टि से, यात्रा पर जाने लगे हैं। वर्ष 2019 में 252,71,965 भारतीयों ने अन्य देशों की यात्रा की है, कोरोना महामारी के चलते यह संख्या वर्ष 2020 में 66,25,080 एवं वर्ष 2021 में 77,24,864 पर आकर कम हो गई थी परंतु वर्ष 2022 में (31 अक्टूबर तक) पुनः तेजी से बढ़कर 183,12,602 हो गई है। विकसित देशों की यात्रा के दौरान ये भारतीय वहां रह रहे नागरिकों के रहन सहन के स्तर एवं बहुत आसान जीवन शैली से बहुत अधिक प्रभावित होकर इन देशों की ओर आकर्षित होते हैं। भारत में आने के बाद ये परिवार लगातार यह प्रयास करना शुरू कर देते हैं कि किस प्रकार इनके बच्चों को इन विकसित देशों में रोजगार प्राप्त हों और मौका मिलते ही अर्थात रोजगार प्राप्त होते ही कई भारतीय इन विकसित देशों में बसने की दृष्टि से चले जाते हैं। साथ ही, आज लाखों भारतीय विदेशों में उच्च शिक्षा एवं उच्च कौशल युक्त क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त करने एवं अपना व्यवसाय प्रारम्भ करने के उद्देश्य से विकसित देशों की ओर रूख कर रहे हैं क्योंकि इन देशों में इन भारतीयों को तुलनात्मक रूप से बहुत अधिक वेतन प्राप्त हो रहा है। इन विकसित देशों में भारतीय मूल के नागरिकों को वहां की नागरिकता प्राप्त होते ही वे अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी इन देशों में बुला लेते हैं एवं सपरिवार इन विकसित देशों में बस जाते हैं।  मोर्गन स्टैन्ली द्वारा वर्ष 2018 में इकोनोमिक टाइम्ज़ में प्रकाशित एक प्रतिवेदन में बताया है कि वर्ष 2014 से वर्ष 2018 के बीच भारत से डॉलर मिलिनायर की श्रेणी के 23,000 भारतीयों ने अन्य देशों में नागरिकता प्राप्त की। डॉलर मिलिनायर उस व्यक्ति को कहा जाता है जिसकी सम्पत्ति 10 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक रहती है। इसी प्रकार, ग्लोबल वेल्थ मायग्रेशन रिव्यू आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में डॉलर मिलिनायर की श्रेणी के 7,000 भारतीयों ने अन्य देशों, विशेष रूप से अमेरिका, में नागरिकता प्राप्त की है।  उक्त संख्या भारत में डॉलर मिलिनायर की कुल संख्या का 2.

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Politics Of Nepal: एक दूसरे की भयंकर विरोधी रही पार्टियों ने कुर्सी के लिए मिलाया हाथ
Currentaffairs Politics Of Nepal: एक दूसरे की भयंकर विरोधी रही पार्टियों ने कुर्सी के लिए मिलाया हाथ

Politics Of Nepal: एक दूसरे की भयंकर विरोधी रही पार्टियों ने कुर्सी के लिए मिलाया हाथ लगभग हजार साल पहले राजा भर्तृहरि ने राजनीति के बारे में जो श्लोक लिखा था, नेपाल की राजनीति ने उसकी सच्चाई उजागर कर दी है। उस श्लोक में कहा गया था- ‘वारांगनेव नृपनीति्रनेकरूपा:’ अर्थात राजनीति वेश्याओं की तरह अनेकरूपा होती है याने वह मौके-मौके पर अपना रूप बदल लेती है। नेपाल में कल तक पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ और शेरबहादुर देउबा मिलकर सरकार बना रहे थे लेकिन अब प्रचंड और केपी ओली आपस में अचानक मिल गए हैं और वे अब अपनी सरकार बना रहे हैं।

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विदेश में रह रहे भारतीय मूल के नागरिक भारत के आर्थिक विकास को गति देने में दे रहे अपना योगदान
Currentaffairs विदेश में रह रहे भारतीय मूल के नागरिक भारत के आर्थिक विकास को गति देने में दे रहे अपना योगदान

विदेश में रह रहे भारतीय मूल के नागरिक भारत के आर्थिक विकास को गति देने में दे रहे अपना योगदान अभी हाल ही में विश्व बैंक ने एक प्रतिवेदन जारी कर बताया है कि विदेशों में रह रहे भारतीयों द्वारा वर्ष 2022 में 10,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि का  विप्रेषण  भारत में किए जाने की सम्भावना है जो पिछले वर्ष 2021 में किए गए 8,940 करोड़ अमेरिकी डॉलर के विप्रेषण की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है। पूरे विश्व में विभिन्न देशों द्वारा विप्रेषण के माध्यम से प्राप्त की जा रही राशि की सूची में भारत का प्रथम स्थान बना हुआ है। इतनी भारी भरकम राशि में अमेरिका, इंग्लैंड एवं सिंगापुर में रह रहे भारतीयों द्वारा किया जाने वाला विप्रेषण भी शामिल है। इन तीनों देशों का योगदान वर्ष 2016 से 2021 के बीच 26 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत हो गया है। जबकि गल्फ कोआपरेशन काउन्सिल (जीसीसी) देशों का योगदान इस अवधि में 54 प्रतिशत से घटकर 28 प्रतिशत हो गया है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि अब भारतीय मूल के नागरिक अमेरिका, इंग्लैंड एवं सिंगापुर सहित अन्य कई विकसित देशों में डॉक्टर, इंजिनीयर एवं सायंटिस्ट जैसे उच्च शिक्षा प्राप्त एवं उच्च कौशल के  पदों पर कार्य कर रहे हैं, जहां आज भारतीयों को अधिकतम वेतन प्राप्त हो रहा है। जबकि पूर्व में अधिकतम भारतीय गल्फ कोआपरेशन काउन्सिल देशों में ब्लू कॉलर जॉब करते रहे हैं, जहां तुलनात्मक रूप से बहुत कम वेतन प्राप्त होता रहा है। इसी कारण के चलते अब अधिकतर भारतीय गल्फ देशों की तुलना में विकसित देशों की ओर अधिक मात्रा में आकर्षित हो रहे हैं। पहिले जहां भारत में सबसे अधिक विप्रेषित राशि यूनाइटेड अरब अमीरात से प्राप्त होती थी वहीं अब सबसे अधिक विप्रेषित राशि अमेरिका से प्राप्त हो रही है। आज अनिवासी भारतीयों की सूची में सूचना प्रौद्योगिकी जैसे तकनीकी क्षेत्र में कार्य करने वाले भारतीयों की संख्या अमेरिका एवं यूरोप के देशों में तेजी से बढ़ती जा रही है, इस वर्ग को तुलनात्मक रूप से अधिक वेतन की राशि प्राप्त होती है जिसके चलते भारतीयों का यह वर्ग विप्रेषण भी अधिक राशि का करता है।  भारत में विप्रेषित की जाने वाली राशि में अत्यधिक वृद्धि के कारकों में भारतीय रुपए का अमेरिकी डॉलर की तुलना में हो रहा अवमूल्यन भी शामिल है। क्योंकि इससे भारतीय नागरिकों को डॉलर की तुलना में रुपए में अधिक राशि का विप्रेषण होता है। मान लीजिए एक अमेरिकी डॉलर की बाजार में कीमत 75 रुपए है और यदि यह बढ़कर 82 रुपए प्रति अमेरिकी डॉलर हो जाती है और ऐसी स्थिति में अमेरिका में रह रहा भारतीय यदि अपने परिवार को 1000 अमेरिकी डॉलर की राशि का विप्रेषण करता है तो उसके भारतीय परिवार को रुपए 75000 के स्थान पर रुपए 82000 प्राप्त होंगे। इस प्रकार रुपए के अवमूल्यन की स्थिति में भारतीय परिवार को अधिक राशि प्राप्त होती है।  भारत को यदि विदेशों में रह रहे भारतीयों द्वारा विप्रेषण के माध्यम से अधिक राशि भेजी जा रही है तो इससे भारत की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत हो रही है क्योंकि इससे भारत में विदेशी मुद्रा का भंडार लगातार बढ़ रहा है, जो कि भारतीय रुपए को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता प्रदान करने में मददगार साबित हो रहा है एवं भारत में अर्थव्यवस्था को गति एवं मजबूती प्रदान करने में सहायक सिद्ध हो रहा है। साथ ही इससे भारत में नया निवेश बढ़ रहा है एवं जिससे यहां रोजगार के नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। इस प्रकार भारत से बाहर रह रहे भारतीय मूल के नागरिकों द्वारा भी भारत के आर्थिक विकास में अपना अतुलनीय योगदान दिया जा रहा है।इसे भी पढ़ें: विकास के मोर्चे पर अमेरिका-चीन की नकल नहीं करे भारत, अन्यथा बढ़ेंगी उलझनेंभारत में लगातार तेज गति से हो रहे आर्थिक विकास के चलते भी भारतीयों का अन्य देशों विशेष रूप से विकसित देशों की ओर रुझान, अपने व्यवसाय को विदेशों में विस्तार देने,  उच्च शिक्षा प्राप्त करने, विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उच्च पदों पर रोजगार प्राप्त करने एवं परिवार सहित विदेशों में घूमने जाने के उद्देश्य से, लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संदर्भ में केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में जारी किए गए आंकड़े सचमुच में चौंकाते हैं।  आज लाखों भारतीय विदेशों में उच्च शिक्षा एवं उच्च कौशल युक्त क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त करने एवं अपना व्यवसाय प्रारम्भ करने के उद्देश्य से विकसित देशों की ओर रूख कर रहे हैं क्योंकि इन देशों में इन भारतीयों को तुलनात्मक रूप से बहुत अधिक वेतन प्राप्त हो रहा है। वर्ष 2019 में 25,25,328 भारतीय, वर्ष 2020 में 7,15,733 भारतीय; वर्ष 2021 में 8,33,880 भारतीय; वर्ष 2022 में (31 अक्टोबर तक) 21,43,873 भारतीय रोजगार प्राप्त करने के उद्देश्य से भारत से बाहर अर्थात विदेशों में चले गए हैं। साथ ही, वर्ष 2019 में 14,67,537 भारतीय; वर्ष 2020 में 2,65,433 भारतीय; वर्ष 2021 में 1,26,611  भारतीय एवं वर्ष 2022 में (31 अक्टोबर तक) 4,64,275 भारतीय अपना व्यवसाय प्रारम्भ करने अथवा अपने वर्तमान व्यवसाय को विस्तार देने के उद्देश्य से विकसित देशों में चले गए हैं। जहां पिछले कुछ वर्षों तक अधिकतम भारतीय ब्लू कॉलर रोजगार प्राप्त करने के उद्देश्य से यूनाइटेड अरब अमीरात की ओर जाते थे वहीं अब सबसे अधिक भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा एवं साइंस जैसे उच्च कौशल के क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त करने के उद्देश्य से अमेरिका एवं अन्य विकसित देशों की ओर जा रहे हैं। वर्ष 2020 में ओईसीडी (ऑर्गनायजेशन फोर इकोनोमिक कोआपरेशन एवं डेवलपमेंट) ने एक प्रतिवेदन जारी कर बताया था कि ओईसीडी समूह के सदस्य देशों में उच्च कुशलता प्राप्त भारतीयों की संख्या इन देशों में आज सबसे अधिक है एवं आज इन देशों में 30 लाख से अधिक भारतीय मूल के नागरिक कार्य कर रहे हैं। ओईसीडी समूह में आज अमेरिका, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया, कनाडा, फ़्रान्स, जर्मनी, नीदरलैण्ड सहित 38 विकसित देश शामिल हैं।  प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से भी विकसित देशों में जा रहे हैं। वर्ष 2019 में 5,86,329 भारतीय छात्र; वर्ष 2020 में 2,59,644 भारतीय छात्र; वर्ष 2021 में 4,44,574 भारतीय छात्र एवं वर्ष 2022 में (31 अक्टूबर तक) 6,48,678 भारतीय छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से विशेष रूप से विकसित देशों में गए हैं।  देश में लगातार तेज गति से हो रहे आर्थिक विकास के चलते कई भारतीयों की आर्थिक स्थिति में इतना अधिक सुधार हुआ है कि वे सपरिवार कई विकसित देशों की पर्यटन की दृष्टि से यात्रा पर जाने लगे हैं। वर्ष 2019 में 252,71,965 भारतीयों ने अन्य देशों की यात्रा की है, कोरोना महामारी के चलते यह संख्या वर्ष 2020 में 66,25,080 एवं वर्ष 2021 में 77,24,864 पर आकर कम हो गई थी परंतु वर्ष 2022 में (31 अक्टोबर तक) पुनः तेजी से बढ़कर 183,12,602 हो गई है। विकसित देशों की यात्रा के दौरान ये भारतीय वहां रह रहे नागरिकों के रहन सहन के स्तर एवं बहुत आसान जीवन शैली से बहुत अधिक प्रभावित होते हैं एवं इन देशों की ओर आकर्षित होते हैं। भारत में आने के बाद ये परिवार लगातार यह प्रयास करना शुरू कर देते हैं कि किस प्रकार इनके बच्चों को इन विकसित देशों में रोजगार प्राप्त हों और मौका मिलते ही अर्थात रोजगार प्राप्त होते ही कई भारतीय इन विकसित देशों में बसने की दृष्टि से चले जाते हैं।  दरअसल वैश्वीकरण के इस युग में पूरा विश्व ही एक गांव के रूप में विकसित हो रहा है। समस्त देश एक तरह से आपस में जुड़ से गए हैं। इन विकसित देशों में रह रहे वहां के मूल नागरिकों का भारतीय मूल के नागरिकों पर विश्वास भी बढ़ता जा रहा है, क्योंकि भारतीय मूल के नागरिकों का चाल चलन, जो भारत की महान सनातन संस्कृति का अनुसरण करता हुआ दिखाई देता है, को देखकर भी इन देशों के मूल नागरिक भारतीय मूल के नागरिकों से बहुत प्रभावित हो रहे हैं एवं आसानी से भारतीय मूल के नागरिकों को इन देशों में उच्च पदों पर आसीन कर रहे हैं। एक तो उच्च शिक्षा प्राप्त, दूसरे उच्च कौशल प्राप्त एवं तीसरे भारतीय सनातन संस्कृति का अनुसरण, इन तीनों विशेषताओं के साथ भारतीय मूल के नागरिक विशेष रूप से विकसित देशों में अपना विशेष स्थान बनाने में लगातार कामयाब हो रहे हैं।    

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Year Ender 2022: जानिये इस साल देश-विदेश में क्या-क्या प्रमुख घटनाएँ घटीं
Currentaffairs Year Ender 2022: जानिये इस साल देश-विदेश में क्या-क्या प्रमुख घटनाएँ घटीं

Year Ender 2022: जानिये इस साल देश-विदेश में क्या-क्या प्रमुख घटनाएँ घटीं साल 2022 में भारत समेत पूरी दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे। महामारी ने हालांकि इस साल भी सबको परेशान किया लेकिन दुनिया इससे उबरती भी नजर आई। खैर.

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आजादी आजादी के नारे सुन जिस तरह PoK से शहबाज शरीफ भागे, उसी तरह एक दिन पाक सेना भी भागेगी
Currentaffairs आजादी आजादी के नारे सुन जिस तरह PoK से शहबाज शरीफ भागे, उसी तरह एक दिन पाक सेना भी भागेगी

आजादी आजादी के नारे सुन जिस तरह PoK से शहबाज शरीफ भागे, उसी तरह एक दिन पाक सेना भी भागेगी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ विरोध बढ़ता ही जा रहा है। हाल ही में जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पीओके के दौरे पर आये थे तब उनको जिस तरह विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा वह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चेतावनी है। दरअसल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की जनता इस बात से नाराज है कि संघीय सरकार जनता से जुड़े मुद्दों की लगातार अनदेखी कर रही है और इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों को खुद भी लूट रही है और चीन को भी इस लूट का हिस्सा दे रही है। पीओके में महंगाई चरम पर है, बेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर पर है लेकिन पाकिस्तान सरकार की किसी भी योजना का लाभ यहां के लोगों को नहीं मिल रहा है। एक तरह से पाकिस्तान की पीओके को लेकर जो नीति है वह पूरी तरह विफल नजर आ रही है। पीओके की जनता देख रही है कि भारत में कश्मीर कैसे फल-फूल रहा है और आगे बढ़ रहा है लेकिन पाकिस्तान अपने अवैध कब्जे वाले कश्मीर की लगातार उपेक्षा कर रहा है। लेकिन अब यहां की जनता ने पाकिस्तान को सबक सिखाने की ठान ली है इसलिए लगातार पाकिस्तान के विरोध में यहां से खबरें देखने सुनने को मिल रही हैं।

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नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोलने की बात करने वाले राहुल गांधी असल में कुछ और ही कर रहे हैं
Currentaffairs नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोलने की बात करने वाले राहुल गांधी असल में कुछ और ही कर रहे हैं

नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोलने की बात करने वाले राहुल गांधी असल में कुछ और ही कर रहे हैं कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पुनर्स्थापना की महत्वाकांक्षी योजना, “भारत जोड़ो यात्रा” ने अब सौ दिन से अधिक दिन पूरे कर लिए हैं लेकिन यात्रा के दौरान हुयी गतिविधियों और राहुल गांधी के बयानों ने इसे “भारत तोड़ो यात्रा बना दिया है। राहुल गांधी कह रहे हैं कि नफरत के इस बाजार में वह मोहब्बत का पैगाम लेकर चल रहे हैं जबकि वास्तविकता कुछ और ही है। यात्रा का अब तक का पूरा समय या तो ऐसे लोगों से मिलने में बीता है जो भारत और हिन्दू विरोधी रहे हैं या फिर भारत के प्रधानमंत्री को अपशब्द कहते। किन्तु विगत कुछ दिनों में तो राहुल गांधी व उनके पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभी मर्यादाओें को ताक पर रख कर विषवमन प्रारंभ कर दिया है।

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