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हनुमान जयंती व्रत से होती है धन की प्राप्ति

हनुमान जयंती व्रत से होती है धन की प्राप्ति

हनुमान जयंती व्रत से होती है धन की प्राप्ति

आज हनुमान जयंती है, हिन्दू धर्म में हनुमान जयंती का खास महत्व होता है तो आइए हम आपको हनुमान जयंती व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं। 

हनुमान जयंती का महत्व 
हिन्दू त्यौहारों में हनुमान जयंती का खास महत्व होता है। इस दिन मंदिरों में हनुमान जी के भक्तों की लम्बी लाइन लगती है। भक्त सिंदूर का चोला और प्रसाद के रूप में बूंदी का लड्डू चढ़ाते हैं। हनुमान जयंती के दिन सुंदरकांड का पाठ करें और सुंदरकांड का पाठ आपको शांति प्रदान करेगा। साथ ही हनुमान चलीसा का पाठ आपको सभी प्रकार के दुखों तथा बीमारियों से दूर रखेगा।
 
हनुमान जयंती के विभिन्न नाम
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में, इस दिन को हनुमान जयंती कहा जाता है। दूसरी ओर, तमिलनाडु में, इस दिन को हनुमथ जयंती कहा जाता है और मार्गशीर्ष अमावस्या के दौरान मनाया जाता है। कर्नाटक में हनुमान जयंती को हनुमान व्रतम के नाम से जाना जाता है।

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ऐसे पाएं हनुमान जी की विशेष कृपा 
हनुमान जी को शिव जी का 11 वां रूद्रावतार माना जाता है। साथ ही हनुमान जी बहुत दयालु है और वह अपने भक्तों पर कृपा बनाएं रखते हैं। इसलिए हनुमान जी की विशेष कृपा पाने के लिए हनुमान जयंती के दिन हनुमान चालीसा का 11 बार या 21 बार पाठ अवश्य करें। इसके अलावा सुंदर कांड का पाठ कर भी आप हनुमान जी के कृपा पात्र बन सकते हैं। 

हनुमान जयंती पर घर में करें ऐसे पूजा 
 हनुमान जयंती के दिन पूर्ण मनोयोग से पूजा करने से  आपको हनुमान जी का आर्शीवाद प्राप्त होगा। इसलिए इस दिन सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करें और स्नान कर साफ कपड़े पहनें। इसके बाद एक चौकी पर गंगा जल छिड़क कर उसे पवित्र करें और उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछा दें। चौकी पर राम, सीता और हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। उनकी प्रतिमा के सामने दिया जलाएं। उसके बाद हनुमान चालीसा, हनुमान जी का मंत्र और रामचरित मानस का पाठ जरूर करें। इसके बाद हनुमान जी की आरती उतारें और उन्हे गुड़ और चने के प्रसाद का भोग लगाएं । साथ ही पूजा के दौरान हुई गलतियों के लिए भगवान से क्षमा मांग लें। 

हनुमान जी के जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा
हनुमान जी को भगवान शिव का 11 वां रूद्र अवतार माना जाता है। पुराणों में हनुमान जी के जन्म के विषय में वर्णन मिलता है। इस कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले अमृत के लिए देवता तथा असुरों में युद्ध होने लगा। उसी समय भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण कर लिया। भगवान विष्णु के इस रूप पर असुर तथा देवता दोनों मोहित हो गए। उसी समय शिवजी ने कामातुर हो कर वीर्य त्याग कर दिया। उस वीर्य को पवनदेव ने वानर राज केसरी की पत्नी अंजनी के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया। इससे माता अंजनी के गर्भ से संकटमोचन हनुमान जी का जन्म हुआ।
 
पिता केसरी को मिले आर्शीवाद से जन्म लिए हनुमान 
हनुमान जी के जन्म से सम्बन्धित एक दूसरी कथा भी प्रचलित है। उस कथा के अनुसार देवताओं के राजा इंद्र के दरबार में एक बहुत सुंदर अप्सरा थीं उनका नाम पुंजिकस्थली था। एक बार जब दुर्वासा ऋषि इंद्र के दरबार में आए तो वह पुंजिकस्थली बार-बार दरबार में अंदर-बाहर करने लगी। इससे दुर्वासा ऋषि बहुत क्रुद्ध हुए और उन्होंने अप्सरा को वानरी होने के श्राप दे दिया। तब अप्सरा ने ऋषि से क्षमा मांगी। कुछ समय बाद पुंजिकस्थली ने वानरों में श्रेष्ठ विरज की पत्नी के गर्भ से वानरी के रूप में जन्म लिया जिसका नाम अंजनी रखा गया। अंजनी का विवाह केसरी नामक के वनराज से कर दिया गया। 

एक बार वनराज केसरी प्रभास तीर्थ गए। वहां कुछ ऋषि तपस्या कर रहे थे तभी वहां एक हाथी आया और वह ऋषियों को परेशान करने लगा। तभी केसरी आए और उन्होंने हाथी का दांत तोड़ दिया। इससे ऋषि प्रसन्न हुए और उन्होंने केसरी को वरदान मांगने को कहा। तब केसरी ने बलशाली, पराक्रमी तथा प्रभु की इच्छानुसार रूप बदलने वाले पुत्र की कामना व्यक्त की। तब ऋषियों में आर्शीवाद दिया जिसके परिणामस्वरूप हनुमान जी का जन्म हुआ।

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हनुमान जयंती पर मंदिरों में होती है पूजा
हनुमान जयंती को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बजरंग बली के भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार उन्हें लाल वस्त्र, ध्वजा, चंदन, सिंदूर का चोला, अगरबती,फूलों में कनेर आदि के पीलोए फूल, धूप, गाय के शुद्ध घी का दीपक, आटे को घी में सेंककर गुड मिलाये हुए, लड्डू जिन्हें कसार के लड्ड आदि का भोग लगाते हैं। हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी को नारियल और पेडों का भोग भी लगाया जाता है। भारत में कई स्थानों जैसे  सालासर, मेंहदीपुर, चांदपोल जैसी जगहों पर इस दिन मेला भी लगता है।

धन प्राप्ति के लिए करें ये उपाय
हनुमान पूजा कोई भी स्त्री पुरुष कर सकते हैं। हनुमान जंयती पर एक विशेष उपाय करने से धन प्राप्ति की राह आसान होती है। हनुमान जी को जल चढ़ाने के बाद पंचामृच चढ़ाएं एवं ध्यान रखें उन्हें केवल लाल फूल ही अर्पित करें।

हनुमान जयंती पर करें पूजा
हनुमान जयंती के दिन सूर्योदय से पहले उठ जाएं। उसके बाद स्नान कर साफ कपड़े पहनें और एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर राम, सीता और हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद बजरंग बली को लाल फूल, सिंदूर,गुड़ चने का प्रसाद,बेसन के लड्डू,गैंदा, गुलाब, कनेर, सूरजमुखी, धूप-अगरबती, केसरयुक्त चंदन, शुद्ध घी या चमेली के तेल का दीपक जलाकर पूजा करें। इस प्रकार हनुमान चालीसा पढ़ कर पूजा करें और अपनी अनजाने में हुई गलतियों हेतु क्षमा मांगें।

- प्रज्ञा पाण्डेय

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