सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद इमरान खान पर हमले को लेकर पाकिस्तान पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी
International सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद इमरान खान पर हमले को लेकर पाकिस्तान पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी

सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद इमरान खान पर हमले को लेकर पाकिस्तान पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर हुए हमले के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। उच्चतम न्यायालय ने प्रांतीय सरकार को मामले में 24 घंटे के भीतर प्राथमिकी दर्ज करने का सोमवार को आदेश दिया था। मामले में हिरासत में लिए गए हमलवार नवीद मोहम्मद बशीर को प्राथमिकी में मुख्य आरोपी के तौर पर नामजद किया गया है और उसके खिलाफ आतकंवाद रोधी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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नीतीश कुमार ने EWS पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत, आरक्षण की सीमा को 50% से आगे बढ़ाने की बात कही
National नीतीश कुमार ने EWS पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत, आरक्षण की सीमा को 50% से आगे बढ़ाने की बात कही

नीतीश कुमार ने EWS पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत, आरक्षण की सीमा को 50% से आगे बढ़ाने की बात कही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आरक्षण की सीमा को 50 फीसदी से आगे बढ़ाने की बात कही है। उन्होंने ईडब्ल्यूएस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी स्वागत किया है। ईडब्ल्यूएस को 10% का आरक्षण ठीक है। जाति आधारित जनगणना भी अगर एक बार हो जाएगी तो 50% आरक्षण की सीमा को बढ़ाया जा सकेगा। इससे आबादी के आधार पर मदद दी जा सकेगी। हम बिहार में इस चीज को करवा रहे हैं, ये देशभर में होना चाहिए। ताकि 50% की सीमा को बढ़ाया जा सके।

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सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को दिया आदेश, 24 घंटे के भीतर इमरान खान पर हमले की प्राथमिकी दर्ज करें
International सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को दिया आदेश, 24 घंटे के भीतर इमरान खान पर हमले की प्राथमिकी दर्ज करें

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को दिया आदेश, 24 घंटे के भीतर इमरान खान पर हमले की प्राथमिकी दर्ज करें पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब प्रांत के महानिरीक्षक को इमरान खान पर हमले पर 24 घंटे के भीतर मामला दर्ज करने का आदेश दिया। इमरान खान ने कहा कि उनके जीवन पर "

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10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस कोटे पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, आरक्षण रहेगा जारी
National 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस कोटे पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, आरक्षण रहेगा जारी

10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस कोटे पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, आरक्षण रहेगा जारी EWS पर सुप्रीम कोर्ट ने सात नवंबर को अहम फैसला देते हुए 10% आरक्षण को जारी रखने के पक्ष में फैसला सुनाया है। अब तक 3-2 से फैसला EWS के पक्ष में न्यायाधीशों ने दिया है। कोर्ट ने संविधान के 103वें संशोधन को सही ठहराते हुए अपना फैसला सुनाया है। 

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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की वर्तमान प्रणाली से कानून मंत्री क्यों हैं नाखुश, क्या अब जजों की नियुक्ति सरकार करेगी?
Mri सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की वर्तमान प्रणाली से कानून मंत्री क्यों हैं नाखुश, क्या अब जजों की नियुक्ति सरकार करेगी?

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की वर्तमान प्रणाली से कानून मंत्री क्यों हैं नाखुश, क्या अब जजों की नियुक्ति सरकार करेगी?

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PM की हाई लेवल मीटिंग से सुप्रीम कोर्ट में याचिका तक, मोरबी हादसे से जुड़े 10 बड़े अपडेट
National PM की हाई लेवल मीटिंग से सुप्रीम कोर्ट में याचिका तक, मोरबी हादसे से जुड़े 10 बड़े अपडेट

PM की हाई लेवल मीटिंग से सुप्रीम कोर्ट में याचिका तक, मोरबी हादसे से जुड़े 10 बड़े अपडेट मोरबी में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मोरबी के दुर्घटनास्थल जाकर हालात का जायजा लिया। वहीं सिविल अस्पताल का दौरा किया और हाई लेवल मीटिंग भी ली। मोरबी दुर्घटनाका मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। ऐसे में हादसे से जुड़ी 10 बड़ी अपडेट आपको देते हैं। दुर्घटनास्थल पर पहुंचे पीएम मोदीप्रधानमंत्री मोदी और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल मोरबी में दुर्घटनास्थल पर पहुंचे जहां खोज और बचाव अभियान जारी है। इस दौरान पीएम मोदी ने मोरबी में चल रहे रेस्क्यू अभियान के बारे में भी जानकारी ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोरबी हादसे का घटनास्थल पर जाकर मुआयना कर लिया है।इसे भी पढ़ें: मोरबी पुल हादसा : चिनफिंग ने राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी को भेजा शोक संदेश, कहा- समाचार सुनकर ‘स्तब्ध’ हूंसिविल अस्पताल में भर्ती घायलों से मुलाकातइस हादसे में घायल हुए लोगों का उपचार किया जा रहा है। वहां जाकर घायलों से पीएम मोदी ने मुलाकात की। उनका हाल-चाल जाना। उन्हें सही ढंग से इलाज मिल पा रहा है या नहीं इस बाबत घायलों से प्रधानमंत्री ने बात भी की।  मोरबी हादसे पर हाई लेवल मीटिंगप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोरबी हादसे के बाद स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और कहा कि इस त्रासदी से संबंधित सभी पहलुओं की पहचान करने के लिए एक “विस्तृत और व्यापक” जांच समय की मांग है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान के मुताबिक, उन्होंने कहा कि जांच से मिले प्रमुख सबकों को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए। बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह मंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद थे। प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद का भरोसाप्रधानमंत्री को राहत अभियान और प्रभावित परिवारों को उपलब्ध कराई गई मदद के बारे में जानकारी दी गई। मोदी ने कहा कि अधिकारियों को प्रभावित परिवारों के संपर्क में रहना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए किदुख की इस घड़ी में उन्हें हर संभव मदद मिले।सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामलामोरबी पुल हादसे का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई है। सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को 14 नवंबर को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया, जिसमें मोरबी ब्रिज ढहने की घटना की जांच शुरू करने के लिए सेवानिवृत्त शीर्ष अदालत के न्यायाधीश की देखरेख में एक न्यायिक आयोग नियुक्त करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। पीएम के आगमन से पहले अस्पताल चमकाने में जुटा प्रशासनप्रधानमंत्री के मोरबी पहुंचने से पहले ही मोरबी का पूरा प्रशासन जिला अस्पताल को चमकाने में जुट गया। इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गई। इसके एक हिस्से में पेंटिंग का काम किए जाने की तस्वीर भी सामने आई। इसे भी पढ़ें: मोरबी हादसा: घटनास्थल पर पहुंच PM मोदी ने रेस्क्यू अभियान के बारे में ली जानकारी, सिविल अस्पताल जाकर घायलों से भी मिलेविपक्ष ने बोला हल्लाकांग्रेस ने अस्पताल में चल रहे काम की तस्वीरें ट्वीट कर कहा, "

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मोरबी पुल हादसा: न्यायिक जांच की याचिका पर 14 नवंबर को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
National मोरबी पुल हादसा: न्यायिक जांच की याचिका पर 14 नवंबर को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

मोरबी पुल हादसा: न्यायिक जांच की याचिका पर 14 नवंबर को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट मोरबी पुल हादसे का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई है। सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को 14 नवंबर को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया, जिसमें मोरबी ब्रिज ढहने की घटना की जांच शुरू करने के लिए सेवानिवृत्त शीर्ष अदालत के न्यायाधीश की देखरेख में एक न्यायिक आयोग नियुक्त करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। भारत के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने याचिका दायर करने वाले वकील द्वारा तत्काल सुनवाई के लिए इसका उल्लेख करने के बाद मामले को 14 नवंबर को सुनवाई के लिए पोस्ट किया।इसे भी पढ़ें: राजद्रोह कानून पर रोक जारी रहेगी, जनवरी के दूसरे हफ्ते में सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्टसीजेआई ने पूछा कि आपकी क्या प्रार्थना है।"

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, रेप मामलों में बैन किया टू फिंगर टेस्ट
National सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, रेप मामलों में बैन किया टू फिंगर टेस्ट

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, रेप मामलों में बैन किया टू फिंगर टेस्ट सुप्रीम कोर्ट ने रेप मामलों में सुनवाई करते हुए एक बड़ा फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट ने रेप मामलों में टू फिंगर टेस्ट पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि टू फिंगर टेस्ट करने वालों को दोषी माना जाएगा। कोर्ट का कहना है कि आज भी देश में टू फिंगर टेस्ट किया जा रहा है, जबकि इसके परीक्षण का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। रेप और यौन उत्पीड़न के मामलों में इस टेस्ट के इस्तेमाल की कई बार न्यायालय ने निंदा की है। इस मामले पर जस्टिस चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि टू फिंगर टेस्ट पर मुकदमा चलना चाहिए। इस टेस्ट से पीड़ित को आघात होता है। उन्होंने कहा कि इस परिक्षण को करने वालों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए। स्टडी मैटिरियल से हटे टेस्टसुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि इस संबंध में मेडिकल कॉलेजों के स्टडी मेटेरियल से इस टेस्ट को हटाया जाए। पीड़िता की जांच करने वाली अवैज्ञानिक विधि से पीड़िता को आघात होता है। कोर्ट ने कहा कि टू फिंगर टेस्ट करने से पीड़िता को फिर से प्रताड़ित किया जाता है। इस टेस्ट के जरिए महिला को फिर से घटना की याद दिलाई जाती है। कोर्ट ने बदला HC का आदेशइस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश को भी पलट दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान ये बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2013 में कोर्ट टू फिंगर टेस्ट को असंवैधानिक माना था। कोर्ट ने पहले भी कहा था कि ऐसा परीक्षण नहीं होना चाहिए। केंद्र सरकार भी कर चूकी है विरोधबता दें कि केंद्र सराकर टू फिंगर टेस्ट को अवैज्ञानिक घोषित कर चुकी है। वर्ष 2014 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने रेप पीड़िताओं के लिए नई गाइडलाइन बनाई थी, जिसमें अस्पतालों के लिए निर्देश जारी किए गए थे। इसके जरिए सभी अस्पतालों में फॉरेंसिक और मेडिकल एग्जामिनेशन के लिए खास कक्ष बनाए जाने का नियम बनाया था। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों में भी टू फिंगर टेस्ट को मना किया गया है। गाइडलाइंस में साफ किया गया है कि असॉल्ट की हिस्ट्री को रिकॉर्ड किया जाए। पीड़िताओं को मानसिक परामर्श दिए जाने का सुझाव भी सरकार द्वारा दिया गया है। किया गया था कमेटी का निर्माणजानकारी के लिए बता दें दि निर्भया कांड के बाद जस्टिस वर्मा कमेटी का निर्माण किया गया था। कमेटी ने 657 पेजों की रिपोर्ट पेश की थी जिसमें कहा गया था कि टू फिंगर टेस्ट के जरिए वजाइना की मांसपेशियों का लचिलापन जानने में मदद मिलती है। ये दर्शाता है कि महिला सेक्सुअली एक्टिव थी या नहीं। हालांकि ये टेस्ट ये बताने में सक्षम नहीं है कि संबंध महिला की मर्जी से बनाए गए या नहीं। ऐसे में इस टेस्ट को बंद करने की मांग की गई थी।

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