Prabhasakshi Exclusive: Shaurya Path में समझिये पहले डोकलाम फिर गलवान और अब तवांग में झड़प के पीछे China की क्या है मंशा
Currentaffairs Prabhasakshi Exclusive: Shaurya Path में समझिये पहले डोकलाम फिर गलवान और अब तवांग में झड़प के पीछे China की क्या है मंशा

Prabhasakshi Exclusive: Shaurya Path में समझिये पहले डोकलाम फिर गलवान और अब तवांग में झड़प के पीछे China की क्या है मंशा अपने शौर्य, साहस और अनुशासन के चलते दुनियाभर की सेनाओं में सबसे विशिष्ट स्थान और सम्मान रखने वाली भारतीय सेना पर हर देशवासी को गर्व है। विषम प्राकृतिक चुनौतियों को झेलते हुए भी हमारे सुरक्षा बल जिस तरह दिन-रात भारत की पावन भूमि की रक्षा में तैनात रहते हैं यह उसी का प्रतिफल है कि आप और हम निडर भाव से अपना जीवन आजादी से बिता पाते हैं और अपने परिवारों संग खुशियां मना पाते हैं। सेना के जवान भले होली और दिवाली पर अपने घर वालों से दूर सरहद की सुरक्षा में तैनात हों लेकिन वह यह जरूर सुनिश्चित करते हैं कि आप अपने परिजनों के साथ होली-दीवाली ही नहीं जीवन का हर दिन खुशहाली के साथ बिता सकें। सेना है तो सुरक्षा है, सेना है तो विश्वास है, सेना है तो आत्मविश्वास है। यह कोई स्लोगन नहीं बल्कि हकीकत है। आज भी इस देश में यदि प्रेरणा का कोई सबसे बड़ा पुंज है तो वह सेना है। हम चुनावों के समय तथा विभिन्न मौकों पर जब देश के प्राथमिक स्कूलों की सुविधाओं का जायजा लेने खासतौर पर वहां जाते हैं तो नन्हे मुन्ने बच्चों से पूछने पर पाते हैं कि अधिकतर बच्चे बड़े होकर सेना में जाना चाहते हैं। उनका यह जवाब उनकी देशभक्ति और सेना के प्रति सम्मान के भाव को स्पष्टतः प्रकट करता है।

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Boycotts of Chinese products: गलवान झड़प के बाद चीन से भारत का आयात तेजी से बढ़ा, जानें व्यापार डेटा क्या कहता है
Business Boycotts of Chinese products: गलवान झड़प के बाद चीन से भारत का आयात तेजी से बढ़ा, जानें व्यापार डेटा क्या कहता है

Boycotts of Chinese products: गलवान झड़प के बाद चीन से भारत का आयात तेजी से बढ़ा, जानें व्यापार डेटा क्या कहता है अरुणाचल प्रदेश के तवांग में चीनी सैनिकों से भारतीय जवानों की झड़प के बाद एक बार फिर से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव देखने को मिला है। इसके साथ ही चीनी समानों के बहिष्कार की बात भी कुछ वर्गों की तरफ से की जाने लगी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में भारत और चीन के व्यापार का जिक्र करते हुए ट्विटर पर लिखा कि हम चीन से अपना व्यापार क्यों नहीं बंद करते हैं?

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Two Front War: एक ही झटके में चित होंगे चीन-पाकिस्तान, भारतीय सेना बनेगी सर्वशक्तिमान, जानें अगले 25 सालों का रोडमैप
Mri Two Front War: एक ही झटके में चित होंगे चीन-पाकिस्तान, भारतीय सेना बनेगी सर्वशक्तिमान, जानें अगले 25 सालों का रोडमैप

Two Front War: एक ही झटके में चित होंगे चीन-पाकिस्तान, भारतीय सेना बनेगी सर्वशक्तिमान, जानें अगले 25 सालों का रोडमैप "

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भारत-चीन झड़प : सीमा मुद्दे पर संसद में चर्चा चाहती है कांग्रेस
National भारत-चीन झड़प : सीमा मुद्दे पर संसद में चर्चा चाहती है कांग्रेस

भारत-चीन झड़प : सीमा मुद्दे पर संसद में चर्चा चाहती है कांग्रेस कांग्रेस ने भारतीय और चीनी सैनिकों की अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के निकट झड़प की घटना को लेकर सोमवार को कहा कि सरकार को इस मामले पर संसद में चर्चा के माध्यम से देश को विश्वास में लेने की जरूरत है। इस मुद्दे पर मंगलवार को संसद में हंगामा होने के आसार हैं क्योंकि कांग्रेस के कई नेता संसद के दोनों सदनों में इस पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव लाने वाले हैं। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी छवि बचाने के लिए देश को खतरे में डाल रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ट्वीट किया, ‘‘एक बार फिर हमारे सैनिकों को चीन ने उकसाया है। हमारे सैनिकों ने बहादुरी से मुकाबला किया और कुछ जवान घायल भी हुए। हम राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राष्ट्र के रूप में एक हैं और इसका राजनीतिकरण नहीं करेंगे। लेकिन मोदी सरकार को एलएसी (लाइन ऑफ एक्जुअल कंट्रोल) पर चीन की आक्रामकता और अप्रैल 2020 से हो रहे निर्माण कार्य को लेकर ईमानदार होना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराके देश को भरोसे में लेना चाहिए। हम अपने जवानों की वीरता और बलिदान के ऋणी हैं।’’ वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ट्वीट किया है, ‘‘भारतीय सेना के शौर्य पर हमें गर्व है। सीमा पर चीन की हरकतें पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। पिछले दो साल से हम बार-बार सरकार को जगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मोदी सरकार केवल अपनी राजनीतिक छवि को बचाने के लिए इस मामले को दबाने में लगी है। इससे चीन का दुस्साहस बढ़ता जा रहा है।’’ रमेश ने आरोप लगाया, ‘‘देश से बड़ा कोई नहीं है, लेकिन मोदी जी अपनी छवि को बचाने के लिए देश को ख़तरे में डाल रहे हैं।’’

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एलएसी पर हुई घटना का भारत-चीन संबंधों पर प्रभाव होगा : भाजपा सांसद
National एलएसी पर हुई घटना का भारत-चीन संबंधों पर प्रभाव होगा : भाजपा सांसद

एलएसी पर हुई घटना का भारत-चीन संबंधों पर प्रभाव होगा : भाजपा सांसद अरुणाचल प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद तापिर गाओ ने सोमवार को कहा कि तवांग सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई ‘हिंसक झड़प’ दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करेगी। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि दोनों देशों की सरकारों को समस्याओं के समाधान के लिए मिलकर काम करना चाहिए। तापिर गाओ ने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘नौ दिसंबर की घटना के बारे में सुनकर मुझे दुख हुआ। मैं इसकी निंदा करता हूं। अगर भविष्य में पीएलए (चीन की सेना, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) ऐसे काम करती रही तो इससे भारत-चीन संबंधों को नुकसान होगा। ’’

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China Coronavirus: चीन में फिर कोरोना का कहर, जरूरी दवाओं की किल्लत, मेडिकल स्टोर के आगे कतारें, ICU की संख्या बढ़ाई गई
International China Coronavirus: चीन में फिर कोरोना का कहर, जरूरी दवाओं की किल्लत, मेडिकल स्टोर के आगे कतारें, ICU की संख्या बढ़ाई गई

China Coronavirus: चीन में फिर कोरोना का कहर, जरूरी दवाओं की किल्लत, मेडिकल स्टोर के आगे कतारें, ICU की संख्या बढ़ाई गई चीन में पाबंदियों में छूट के बाद कोरोना फिर से हराने लगा है। मरीजों की संख्या में खतरनाक तरीके से इजाफा हुआ है। दवा की दुकानों पर लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। कमी के कारण कई जरूरी दवाओं की कीमतें आसमान बने लगी है। कोहि में उछाल को देखते हुए चिनफिंग सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने का प्रयास कर रही है। इसके तहत अस्पतालों में बड़े पैमाने पर आईसीयू खोले जा रहे हैं। सरकार ने साफ किया है कि कोरोना वायरस के प्रसार को हर हाल में रोकेंगे, लेकिन विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए लाकडाउन या क्वारंटीन जैसे सख्त नियम फिर से लागू करना आसान नहीं है।इसे भी पढ़ें: सऊदी-चीनी 'भाई भाई': फ्लाइ पास्ट से स्वागत, बैंगनी कॉरपेट वेलकम, जिनपिंग ने खाड़ी देश का किया मूड स्विंग, ड्रैगन ने क्यों मिडिल ईस्ट में बढ़ाई अपनी भागीदारी?

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तवांग सेक्टर में एलएसी पर भारत, चीन के सैनिकों में झड़प;दोनों पक्षों के कुछ जवान मामूली रूप से घायल
National तवांग सेक्टर में एलएसी पर भारत, चीन के सैनिकों में झड़प;दोनों पक्षों के कुछ जवान मामूली रूप से घायल

तवांग सेक्टर में एलएसी पर भारत, चीन के सैनिकों में झड़प;दोनों पक्षों के कुछ जवान मामूली रूप से घायल भारतीय और चीनी सैनिकों की अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के निकट एक स्थान पर नौ दिसंबर को झड़प हुई, जिसमें ‘‘दोनों पक्षों के कुछ जवान मामूली रूप से घायल हो गए।’’ भारतीय सेना ने सोमवार को यह जानकारी दी। पूर्वी लद्दाख में दोनों पक्षों के बीच 30 महीने से अधिक समय से जारी सीमा गतिरोध के बीच पिछले शुक्रवार को संवेदनशील क्षेत्र में एलएसी पर यांग्त्से के पास झड़प हुई। भारतीय थलसेना ने एक बयान में कहा, ‘‘पीएलए के सैनिकों के साथ तवांग सेक्टर में एलएसी पर नौ दिसंबर को झड़प हुई। हमारे सैनिकों ने चीनी सैनिकों का दृढ़ता के साथ सामना किया। इस झड़प में दोनों पक्षों के कुछ जवानों को मामूली चोटें आईं।’’ इसने कहा, ‘‘दोनों पक्ष तत्काल क्षेत्र से पीछे हट गए। इसके बाद हमारे कमांडर ने स्थापित तंत्रों के अनुरूप शांति बहाल करने के लिए चीनी समकक्ष के साथ ‘फ्लैग बैठक’ की।’’ सेना के बयान में झड़प में शामिल सैनिकों और घटना में घायल हुए सैनिकों की संख्या का उल्लेख नहीं किया गया। इसने कहा कि तवांग सेक्टर में एलएसी पर क्षेत्रों को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग धारणा है। सेना ने कहा, ‘‘अरुणाचल प्रदेश में तवांग सेक्टर में एलएसी से सटे अपने दावे वाले कुछ क्षेत्रों में दोनों पक्ष गश्त करते हैं। यह सिलसिला 2006 से जारी है।’’ माना जाता है कि झड़प में घायल हुए चीनी सैनिकों की संख्या काफी अधिक हो सकती है। पूर्वी लद्दाख में रिनचेन ला के पास अगस्त 2020 के बाद से भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच यह पहली बड़ी झड़प है। भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच पिछले साल अक्टूबर में भी यांग्त्से के पास एक संक्षिप्त टकराव हुआ था और स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार दोनों पक्षों के स्थानीय कमांडरों के बीच बातचीत के बाद इसे सुलझा लिया गया था। जून 2020 में गलवान घाटी में भीषण संघर्ष के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में काफी तल्खी आ गई थी। दोनों पक्षों ने एलएसी पर धीरे-धीरे हजारों सैनिकों और भारी हथियारों की तैनाती कर दी। पूर्वी लद्दाख गतिरोध के बाद, भारतीय सेना ने पूर्वी थिएटर में एलएसी पर अपनी अभियानगत क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाया है। पूर्वी थिएटर में बड़े पैमाने पर सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में एलएसी से लगते सीमावर्ती क्षेत्र शामिल हैं तथा सीमांत क्षेत्रों में तवांग और उत्तरी सिक्किम क्षेत्र सहित कई संवेदनशील अग्रिम स्थान हैं। सैन्य अधिकारियों ने कहा कि सेना ने एक प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित किया है और पिछले दो वर्षों में क्षेत्रों की समग्र निगरानी में काफी सुधार हुआ है। सितंबर में, सेना की पूर्वी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता ने कहा था कि भारतीय सेना एलएसी पर पीएलए की गतिविधियों की लगातार निगरानी कर रही है और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। गौरतलब है कि पांच मई, 2020 को शुरू हुए पूर्वी लद्दाख गतिरोध के बाद भारत लगभग 3,500 किलोमीटर लंबी एलएसी के निकट बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी ला रहा है।

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चीन बना पूरी तरह से अंतरिक्ष स्टेशन वाला पहला देश, जानिए कैसा है ‘तियांगोंग’
International चीन बना पूरी तरह से अंतरिक्ष स्टेशन वाला पहला देश, जानिए कैसा है ‘तियांगोंग’

चीन बना पूरी तरह से अंतरिक्ष स्टेशन वाला पहला देश, जानिए कैसा है ‘तियांगोंग’ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन अब एकमात्र ऐसा स्थान रहीं रह जाएगा, जिसमें मनुष्य कक्षा में रह सकते हैं। इस साल 29 नवंबर को चीन के गोबी डेजर्ट नामक स्थान से शेंजू 15 मिशन शुरू हुआ था, जिसके जरिए तीन अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए थे। छह घंटे बाद वे अपने गंतव्य तक पहुंच गए। चीन ने हाल में अपना अंतरिक्ष स्टेशन तैयार किया है, जिसका नाम ‘तियांगोंग’ है। मंदारिन में ‘तियांगोंग’ का अर्थ ‘स्वर्ग का महल’ होता है। इस मिशन के तहत अंतरिक्ष में गए तीन अंतरिक्ष यात्री वहां पहले से मौजूद दल की जगह लेंगे, जिसने स्टेशन के निर्माण में मदद की है।

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Space debris: चीन की अंतरिक्ष गतिविधियों पर नजर रख रहा अमेरिका
International Space debris: चीन की अंतरिक्ष गतिविधियों पर नजर रख रहा अमेरिका

Space debris: चीन की अंतरिक्ष गतिविधियों पर नजर रख रहा अमेरिका बीजिंग। पृथ्वी की निचली कक्षा में तेजी से इकट्ठे होते मलबे के बीच अमेरिका चीन की उन गतिविधियों पर करीबी नजर रख रहा है, जो अंतरिक्ष में अमेरिकी संपत्ति को संभावित रूप से खतरे में डाल सकती हैं। अंतरिक्ष में अमेरिका के सैन्य अभियान के प्रमुख ने शुक्रवार को यह बात कही। यूएस स्पेस कमांड आर्मी के कमांडर जनरल जेम्स डिकिंसन ने संयुक्त राष्ट्र में उस प्रस्ताव के भारी मतों से पारित होने का स्वागत किया, जिसमें यह प्रावधान किया गया है कि देश सीधी उड़ान भरने वाली उपग्रह रोधी प्रणाली का परीक्षण नहीं करेंगे, जो बड़े पैमाने पर अंतरिक्ष मलबा पैदा कर उपग्रहों और अंतरिक्ष स्टेशन के अस्तित्व को खतरे में डालती हैं।

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Opinion: न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री ने कहा चीन का रवैया निस्संदेह पहले से अधिक आक्रामक
International Opinion: न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री ने कहा चीन का रवैया निस्संदेह पहले से अधिक आक्रामक

Opinion: न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री ने कहा चीन का रवैया निस्संदेह पहले से अधिक आक्रामक न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री के रूप में अपने पिछले पांच के कार्यकाल पर गौर करते हुए जैसिंडा अर्डर्न ने कहा कि इस दौरान क्षेत्र में चीन का रवैया निस्संदेह पहले से अधिक आक्रामक हुआ है। उन्होंने साथ ही सचेत किया कि छोटे प्रशांत देशों के साथ संबंध बनाना, दूसरे पर हावी होने की कोशिश करने का खेल नहीं बनना चाहिए। अर्डर्न ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ और ‘ऑस्ट्रेलियन एसोसिएटेड प्रेस’ के साथ बृहस्पतिवार को एक संयुक्त साक्षात्कार में कहा कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नेतृत्व में चीन हाल के वर्षों में बदल गया है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यदि मैं थोड़ा दूर से क्षेत्र को देखूं तो हमारे क्षेत्र में हमने जो कुछ बदलाव देखे हैं, उनमें से एक यह है कि हम अधिक आक्रामक चीन को देखते हैं।’’

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National Squash Championship: अभय सिंह और जोशना चिनप्पा राष्ट्रीय स्क्वाश में आगे बढ़े
Sports National Squash Championship: अभय सिंह और जोशना चिनप्पा राष्ट्रीय स्क्वाश में आगे बढ़े

National Squash Championship: अभय सिंह और जोशना चिनप्पा राष्ट्रीय स्क्वाश में आगे बढ़े शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ियों अभय सिंह और जोशना चिनप्पा ने बुधवार को यहां राष्ट्रीय स्क्वाश चैंपियनशिप में क्रमश: पुरुष और महिला वर्ग में अपने-अपने मैच जीते। अभय सिंह ने एसएससीबी के नवीन जांगड़ा को 11-8, 11-2, 8-11, 11-4 से जबकि 18 बार की राष्ट्रीय चैम्पियन चिनप्पा ने राजस्थान की यशी जैन को 11-3, 11-6, 11-6 से पराजित किया। महाराष्ट्र के वीर छोटरानी ने कान्हाव नानावटी (तमिलनाडु) को सीधे गेम में 11-8, 11-5, 11-5 से हराकर उलटफेर किया।

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अमेरिका ने ताइवान को दो नए महत्वपूर्ण हथियारों की बिक्री की मंजूरी दी, चीन हो सकता है नाराज
International अमेरिका ने ताइवान को दो नए महत्वपूर्ण हथियारों की बिक्री की मंजूरी दी, चीन हो सकता है नाराज

अमेरिका ने ताइवान को दो नए महत्वपूर्ण हथियारों की बिक्री की मंजूरी दी, चीन हो सकता है नाराज अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने ताइवान को दो नए महत्वपूर्ण हथियारों की बिक्री की मंगलवार को मंजूरी दे दी। इस कदम से चीन के नाराज होने की पूरी संभावना है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ताइवान के एफ-16 लड़ाकू विमानों के बेड़े, जी-130 परिवहन विमानों और अमेरिका द्वारा आपूर्ति किए जाने वाली अन्य हथियार प्रणालियों का समर्थन करने के लिए 42.

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China को टक्कर देने के लिए मोदी सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में किया ये काम, जानें कैसे साबित होगा गेमचेंजर
National China को टक्कर देने के लिए मोदी सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में किया ये काम, जानें कैसे साबित होगा गेमचेंजर

China को टक्कर देने के लिए मोदी सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में किया ये काम, जानें कैसे साबित होगा गेमचेंजर सरहद पर चीन की किसी भी हिमाकत से निपटने के लिए भारत बिल्कुल तैयार है।भारत के इंफ्रास्ट्रचर बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि देखने को मिलेगी। अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे का निर्माण चीन को जवाब देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 40 हजार करोड़ की लागत से फ्रंटियर हाइवे का निर्माण किया जाएगा। विशेष रूप से पूर्वोत्तर में एलएसी के साथ बुनियादी ढांचे के विकास पर बहुत जोर दिया गया है। विचार चल रही परियोजनाओं को तेजी से ट्रैक करना और नई शुरुआत करना है। इस तरह का ध्यान केंद्रित किया गया है कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के बजट में महत्वपूर्ण तेजी देखने को मिली है। इसे भी पढ़ें: एमनेस्टी इंटरनेशनल कनाडा ने कहा चीन ने हम पर प्रायोजित साइबर हमले किएक्या-क्या काम हो रहा है?

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एमनेस्टी इंटरनेशनल कनाडा ने कहा चीन ने  हम पर प्रायोजित साइबर हमले किए
International एमनेस्टी इंटरनेशनल कनाडा ने कहा चीन ने हम पर प्रायोजित साइबर हमले किए

एमनेस्टी इंटरनेशनल कनाडा ने कहा चीन ने हम पर प्रायोजित साइबर हमले किए एमनेस्टी इंटरनेशनल की कनाडा की शाखा ने सोमवार को कहा कि उस पर चीन द्वारा प्रायोजित साइबर हमले किए गए। मानवाधिकार संगठन ने कहा कि पहली बार पांच अक्टूबर को इसका पता चला और इसकी जांच के लिए फोरेंसिक जांचकर्ताओं तथा साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को नियुक्त किया। एमनेस्टी इंटरनेशनल कनाडा की महासचिव केटी निव्याबंदी ने बताया कि उनकी प्रणालियों पर हुए साइबर हमले विशेष रूप से व पूरी तरह से चीन और हांगकांग के साथ-साथ कुछ प्रमुख चीनी कार्यकर्ताओं से संबंधित थे।

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व्हाइट हाउस के पास कुछ लोगों ने किया प्रदर्शन, ‘‘चीन को आजाद करो’’ के नारे लगाए
International व्हाइट हाउस के पास कुछ लोगों ने किया प्रदर्शन, ‘‘चीन को आजाद करो’’ के नारे लगाए

व्हाइट हाउस के पास कुछ लोगों ने किया प्रदर्शन, ‘‘चीन को आजाद करो’’ के नारे लगाए चीन में कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लगाई गईं कड़ी पाबंदियों और राजनीतिक बदलाव के लिए जारी प्रदर्शन के समर्थन में अमेरिका में व्हाइट हाउस के पास रविवार को करीब 200 लोगों ने एकत्रित होकर मोमबत्तियां जलाईं और ‘‘चीन को आजाद करो’’ के नारे लगाए। फ्रीडम प्लाजा में प्रदर्शनकारियों ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनकी सरकार से सत्ता छोड़ने की मांग करते हुए कहा ,‘‘ कोई तानाशाही नहीं, कोई सेंसरशिप नहीं।’’ कुछ लोग हाथ में कोरे कागज लिए नजर आए, जो पार्टी की व्यापक सेंसरशिप के विरोध के प्रतीक थे। कुछ ने ‘‘ चीन को आजाद करो’’के नारे लगाए।

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अमेरिका ने पाकिस्तान और चीन समेत 12 देशों को विशेष चिंता वाला देश घोषित किया
International अमेरिका ने पाकिस्तान और चीन समेत 12 देशों को विशेष चिंता वाला देश घोषित किया

अमेरिका ने पाकिस्तान और चीन समेत 12 देशों को विशेष चिंता वाला देश घोषित किया वाशिंगटन। अमेरिका ने चीन, पाकिस्तान और म्यांमा समेत 12 देशों को वहां की धार्मिक स्वतंत्रता की मौजूदा स्थिति को लेकर ‘‘विशेष चिंता वाले देश’’ घोषित किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने शुक्रवार को इस बाबत घोषणा करते हुए कहा कि दुनिया भर में सरकारें तथा सरकार से इतर तत्व लोगों का उनकी आस्थाओं के आधार पर उत्पीड़न करते हैं, उन्हें धमकाते हैं, जेल में डाल देते हैं और यहां तक कि लोगों की हत्या कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि कुछ उदाहरणों में, वे राजनीतिक लाभ के अवसरों का फायदा उठाने के लिए लोगों की धर्म या आस्था की स्वतंत्रता का गला घोंटते हैं।

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चीन में प्रदर्शन : सेंसरशिप से बचने के लिए इंटरनेट उपयोगकर्ता खेल रहे चूहे-बिल्ली का खेल
International चीन में प्रदर्शन : सेंसरशिप से बचने के लिए इंटरनेट उपयोगकर्ता खेल रहे चूहे-बिल्ली का खेल

चीन में प्रदर्शन : सेंसरशिप से बचने के लिए इंटरनेट उपयोगकर्ता खेल रहे चूहे-बिल्ली का खेल चीन की आर्थिक राजधानी शंघाई में कोविड-19 सबंधी प्रतिबंधों को हटाने और आजादी की मांग करते सैकड़ों लोगों के प्रदर्शनके वीडियो ‘वीचैट’ पर शनिवार रात को सामने आए, लेकिन सेंसर किए जाने से पहले महज कुछ ही मिनट तक इस सोशल मीडिया मंच पर ये रह सके। बीजिंग के रहने वाले 26 वर्षीय एलियट वांग (सरकार की कार्रवाई से बचने के लिए अंग्रेजी नाम ही बताया) इससे स्तब्ध हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इन वीडियो के सेंसर होने से पहले लगातार रिफ्रेश करता रहा और इन वीडियो को सेव करता रहा, स्क्रीन शॉट लेता रहा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरे बहुत सारे दोस्त शंघाई के प्रदर्शनों का वीडियो साझा कर रहे हैं। मैंने भी इन्हें साझा किया है, लेकिन उन्हें जल्द ही प्रशासन द्वारा हटा दिया जा रहा है।’’ वांग चीन के उन लाखों इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में से हैं, जो सेंसरशिप को धता बताने के लिए प्रशासन के साथ चूहे-बिल्ली का खेल रहे हैं। चीनी अधिकारियों ने देश में इंटरनेट को कड़े नियंत्रण में रखा है और लगभग सभी विदेशी समाचार और सोशल मीडिया मंच की पहुंच रोकने के लिए जटिल बहुस्तरीय सेंसरशिप ऑपरेशन को अंजाम देते हैं। चीन में राजनीतिक रूप से संवेदनशील शब्दों या चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की आलोचना वाले शब्दों को इंटरनेट पर प्रतिबंधित विषयों में शामिल किया गया है। इसलिए प्रदर्शन के जारी हो रहे वीडियो को तत्काल हटा दिया जा रहा है। प्रशासन की सख्ती के बावजूद प्रदर्शन की तस्वीरें ‘वीचैट’ पर प्रसारित हो रही हैं, जो चीनी सोशल नेटवर्किंग साइट है और इसके एक अरब उपयोगकर्ता हैं। ये प्रदर्शन पश्चिमोत्तर शहर उरुम्की में 24 नवंबर को प्राणघातक अग्निकांड के बाद शुरू हुए। कई लोगों का मानना है कि लॉकडाउन की वजह से लोग बाहर नहीं निकल पाए।

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चीन में विरोध दुर्लभ नहीं हैं - लेकिन वर्तमान अशांति महत्वपूर्ण है
International चीन में विरोध दुर्लभ नहीं हैं - लेकिन वर्तमान अशांति महत्वपूर्ण है

चीन में विरोध दुर्लभ नहीं हैं - लेकिन वर्तमान अशांति महत्वपूर्ण है चीन भर में सड़कों पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने थ्येनआनमन चौराहे पर हुए प्रदर्शन की यादें ताजा कर दी हैं, जिन्हें 1989 में बेरहमी से कुचल दिया गया था। दरअसल, विदेशी मीडिया का कहना है कि चीन के कई शहरों में फैली यह अशांति अतीत की उन घटनाओं के बाद देखी गई घटनाओं से एकदम अलग है। निहितार्थ यह है कि चीन में विरोध दुर्लभ है। इस बीच, 30 नवंबर, 2022 को जियांग जेमिन की मौत हो गई, जिन्हें 1989 में खूनी कार्रवाई के बाद लाया गया था और उनका निधन इस बात पर गौर करने का और कारण देता है कि थ्येनआनमन चौराहे के नरसंहार के बाद से चीन कैसे बदल गया है, और कम्युनिस्ट पार्टी के नेता अब अशांति पर कैसे प्रतिक्रिया दे सकते हैं .

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चीन का एलएसी के पास सेना की चौकी बनाना एक और चिंताजनक संकेत: अमेरिकी सांसद कृष्णमूर्ति
International चीन का एलएसी के पास सेना की चौकी बनाना एक और चिंताजनक संकेत: अमेरिकी सांसद कृष्णमूर्ति

चीन का एलएसी के पास सेना की चौकी बनाना एक और चिंताजनक संकेत: अमेरिकी सांसद कृष्णमूर्ति अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने बुधवार को कहा कि भारत के साथ लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एनएसी) के पास चीन द्वारा सैन्य चौकी का निर्माण किया जाना अपने पड़ोसियों के प्रति चीनी आक्रामकता का चिंताजनक संकेत है। उन्होंने इस संबंध में आई एक खबर के बाद यह टिप्पणी की। समाचार पत्र ‘पॉलिटिको’ ने बुधवार को दावा किया कि चीन ने भारत के साथ अपनी विवादित सीमा के पास एक सैन्य चौकी बनाई है।

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चीन ने अमेरिका को दी चेतावनी, भारत के साथ हमारे रिश्तों पर न दें दखल
International चीन ने अमेरिका को दी चेतावनी, भारत के साथ हमारे रिश्तों पर न दें दखल

चीन ने अमेरिका को दी चेतावनी, भारत के साथ हमारे रिश्तों पर न दें दखल चीन और अमेरिका के बीच की तल्खी किसी से छुपी नहीं है। कभी ताइवान को लेकर तो कभी उसकी विस्तारवादी नीति को लेकर हमेशा से चीन व्हाइट हाउस के निशाने पर रहा है। वहीं बीजिंग की तरफ से भी अमेरिका को लगातार धमकी दी जाती रही है। लेकिन अब भारत को लेकर चीन ने अमेरिका को सीधी चेतावनी दे दी है। चीन ने अमेरिका को भारत के साथ अपने रिश्तों को लेकर दखल न देने की चेतावनी दी है। पेंटागन ने कांग्रेस को भेजी एक रिपोर्ट में कहा है कि चीन ने अमेरिकी अधिकारियों को भारत के साथ उसके संबंधों में दखलअंदाजी नहीं करने की चेतावनी दी है।इसे भी पढ़ें: अंतरिक्ष में पहली बार एकत्रित हुए चीन के छह अंतरिक्ष यात्रीपेंटागन ने एक रिपोर्ट में कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत के साथ अपने गतिरोध के दौरान, चीनी अधिकारियों ने संकट की गंभीरता को कम करने की कोशिश की, सीमा की स्थिरता को बनाए रखने और भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों के अन्य क्षेत्रों को नुकसान पहुँचाने से गतिरोध को रोकने के बीजिंग के इरादे पर जोर दिया। पीआरसी (पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अधिक निकटता से भागीदार बनाने के लिए सीमा तनाव को रोकने का प्रयास करता है। पेंटागन ने चीनी सैन्य निर्माण पर कांग्रेस को अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा, पीआरसी अधिकारियों ने अमेरिकी अधिकारियों को भारत के साथ पीआरसी के संबंधों में हस्तक्षेप नहीं करने की चेतावनी दी है।इसे भी पढ़ें: 1989 जैसा Tiananmen नरसंहार कहीं फिर से दोहरा न दे चीन?

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चीन की अमेरिका को चेतावनी, कहा भारत के साथ उसके संबंधों में दखल नहीं दे
International चीन की अमेरिका को चेतावनी, कहा भारत के साथ उसके संबंधों में दखल नहीं दे

चीन की अमेरिका को चेतावनी, कहा भारत के साथ उसके संबंधों में दखल नहीं दे चीन ने अमेरिकी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि वे भारत के साथ उसके संबंधों में दखल नहीं दें। अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने कांग्रेस में पेश एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। पेंटागन ने मंगलवार को पेश एक रिपोर्ट में कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत के अपने टकराव के बीच चीनी अधिकारियों ने संकट की गंभीरता को कम करने की कोशिश की और जोर दिया कि चीन की मंशा सीमा पर स्थिरता कायम करना है और भारत के साथ उसके द्विपक्षीय संबंध के अन्य क्षेत्रों को गतिरोध से होने वाले नुकसान से बचाना है। चीन की सैन्य निर्माण क्षमता पर कांग्रेस को दी गई अपनी हालिया रिपोर्ट में पेंटागन ने कहा, ‘‘चीनी गणराज्य (पीआरसी) तनाव कम करना चाहता है ताकि भारत अमेरिका के और करीब नहीं जाए। पीआरसी के अधिकारियों ने अमेरिकी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि वे भारत के साथ पीआरसी के संबंधों में हस्तक्षेप न करें।’’ पेंटागन ने कहा कि चीन-भारत सीमा पर एक खंड में 2021 के दौरान पीएलए ने सैन्य बलों की तैनाती को बनाए रखा और एलएसी के पास बुनियादी ढांचे का निर्माण जारी रखा।

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