जम्मू-कश्मीर के युवा सरकारी समर्थन से बन रहे हैं  कृषि उद्यमी
Business जम्मू-कश्मीर के युवा सरकारी समर्थन से बन रहे हैं कृषि उद्यमी

जम्मू-कश्मीर के युवा सरकारी समर्थन से बन रहे हैं कृषि उद्यमी जम्मू-कश्मीर सरकार ने रविवार को कहा कि उसने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को रोजगार के एक जरिये के रूप में अपनाने के लिए युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए नवोन्मेषी कदम एवं नीतिगत निर्णय लिए हैं। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, पिछले दो वर्षों में सरकार कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र को एक स्थायी और लाभदायक आर्थिक गतिविधि बनाने के लिए वैज्ञानिक तर्ज और बाजार-उन्मुख नीतियों पर उन्नत कृषि प्रणाली में बदलने की कोशिश में लगी हुई है। प्रवक्ता ने कहा कि कृषि सुधार की सभी चुनौतियों का सामना करते हुए जम्मू कश्मीर की रैंकिंग मासिक कृषि आय के मामले में बेहतर हुई है और यह शीर्ष पांच राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में शामिल हो चुका है। प्रवक्ता के मुताबिक, ‘‘जम्मू कश्मीर में कृषि क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं और सरकार के ठोस प्रयास छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। कृषि-आधारित उद्योगों में पिछले दो साल जितना सघन वृक्षारोपण निवेश कभी नहीं हुआ था।”

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सरकारी योजनाओं की मदद से झींगा उत्पादन में हाथ आजमा रहीं हरियाणा की महिलाएं
Business सरकारी योजनाओं की मदद से झींगा उत्पादन में हाथ आजमा रहीं हरियाणा की महिलाएं

सरकारी योजनाओं की मदद से झींगा उत्पादन में हाथ आजमा रहीं हरियाणा की महिलाएं हरियाणा राज्य की महिलाएं उन सरकारी योजनाओं की मदद से झींगा उत्पादन कर रही हैं जिनमें गैर-परंपरागत या वैकल्पिक खेती को बढ़ावा दिया जाता है। सिरसा जिले की वीरपाल कौर ने 2016-17 में सफेद झींगे की खेती 2.

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खट्टर सरकार की हार की उलटी गिनती आदमपुर उपचुनाव से शुरू होगी : भूपेंद्र सिंह हुड्डा
National खट्टर सरकार की हार की उलटी गिनती आदमपुर उपचुनाव से शुरू होगी : भूपेंद्र सिंह हुड्डा

खट्टर सरकार की हार की उलटी गिनती आदमपुर उपचुनाव से शुरू होगी : भूपेंद्र सिंह हुड्डा आदमपुर (हरियाणा)। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रविवार को दावा किया कि हरियाणा में भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है और आदमपुर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के साथ उसकी हार की उलटी गिनती शुरू हो जाएगी। हुड्डा ने कहा, ‘‘केवल आदमपुर ही नहीं पूरे हरियाणा में लोग कांग्रेस को उम्मीद की नजर से देख रहे हैं।’’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली राज्य सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही है और आज बेरोजगारी तथा महंगाई अपने चरम पर है।

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पहले छह महीनों में राज्य में मोटरसाइकिलों की बिक्री में गिरावट से उलझन में आंध्र प्रदेश सरकार
Business पहले छह महीनों में राज्य में मोटरसाइकिलों की बिक्री में गिरावट से उलझन में आंध्र प्रदेश सरकार

पहले छह महीनों में राज्य में मोटरसाइकिलों की बिक्री में गिरावट से उलझन में आंध्र प्रदेश सरकार आंध्र प्रदेश सरकार चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में राज्य में मोटरसाइकिलों की बिक्री में 6.

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सपा का भाजपा पर आरोप, कहा सरकार ने होली, दीपावली पर मुफ्त गैस सिलेंडर देने का वादा पूरा नहीं किया
National सपा का भाजपा पर आरोप, कहा सरकार ने होली, दीपावली पर मुफ्त गैस सिलेंडर देने का वादा पूरा नहीं किया

सपा का भाजपा पर आरोप, कहा सरकार ने होली, दीपावली पर मुफ्त गैस सिलेंडर देने का वादा पूरा नहीं किया समाजवादी पार्टी ने रविवार को योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार पर विधानसभा चुनाव के दौरान उज्‍ज्‍वला योजना के लाभार्थियों को मुफ्त में एक-एक गैस सिलेंडर देने का वादा पूरा न करने का आरोप लगाया। वहीं, भाजपा ने सपा पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। सपा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से रविवार को ट्वीट किया, ‘‘झूठे वादे करने में योगी सरकार नंबर एक। चुनाव के समय उज्ज्वला योजना लाभार्थियों को होली और दीपावली पर एक-एक सिलेंडर मुफ्त देने का वादा करने वाली भाजपा सरकार ने मुफ्त में सिलेंडर नहीं दिया।’’ साथ ही सपा ने आरोप लगाया कि भाजपा से बड़ा झूठा और धोखेबाज कोई नहीं है। सपा ने ट्वीट में कानपुर देहात का एक वीडियो साझा किया है जिसमें उज्जवला योजना के लाभार्थी यह कहते सुने जा रहे हैं कि उन्‍हें होली और दीपावली पर मुफ्त गैस सिलेंडर नहीं मिला और वह लोग घर में चूल्हे पर खाना पका रहे हैं। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने सपा पर पलटवार करते हुए पीटीआई- से कहा, ‘‘योगी सरकार गांव-गरीब-किसान के लिए काम कर रही है और समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास को पहुंचाया गया है।

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सरकार ने चीनी निर्यात पर लगी पाबंदी एक साल के लिए बढ़ाई
Business सरकार ने चीनी निर्यात पर लगी पाबंदी एक साल के लिए बढ़ाई

सरकार ने चीनी निर्यात पर लगी पाबंदी एक साल के लिए बढ़ाई सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के मकसद से इसके निर्यात पर लगी पाबंदियों को अगले साल 31 अक्टूबर तक के लिए बढ़ा दिया है। चीनी निर्यात पर लगी बंदिशें इस साल 31 अक्टूबर को ही खत्म होने वाली थीं। लेकिन विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने अब इसे एक साल के लिए बढ़ा दिया है। डीजीएफटी ने शुक्रवार शाम को जारी एक अधिसूचना में इसकी जानकारी देते हुए कहा, ‘‘कच्ची, रिफाइंड और सफेद चीनी के निर्यात पर लगी पाबंदियों को 31 अक्टूबर, 2022 से आगे 31 अक्टूबर, 2023 या फिर अगले आदेश तक के लिए बढ़ा दिया गया है। इससे संबंधित बाकी सारी शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी।’’ हालांकि सरकार ने यह साफ किया है कि ये पाबंदियां यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका को सीएक्सएल और टीआरक्यू शुल्क रियायत कोटा के तहत किए जाने वाले निर्यात पर लागू नहीं होंगी। इन दोनों बाजारों में सीएक्सएल और टीआरक्यू व्यवस्था के तहत एक तय मात्रा में चीनी निर्यात की जाती है। एक निर्यातक को चीनी निर्यात करने के लिए सरकार से लाइसेंस यानी अनुमति की जरूरत होगी। चीनी निर्यात के प्रतिबंधित वस्तुओं की श्रेणी में आती है। भारत चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक होने के साथ इस साल दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक भी रहा है।

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गुजरात सरकार ने पेश की नई इलेक्ट्रॉनिक्स नीति
Business गुजरात सरकार ने पेश की नई इलेक्ट्रॉनिक्स नीति

गुजरात सरकार ने पेश की नई इलेक्ट्रॉनिक्स नीति गुजरात सरकार ने शनिवार को नई इलेक्ट्रॉनिक्स नीति पेश की जिसका उद्देश्य राज्य में ‘इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण’ (ईएसडीएम)’ क्षेत्र में रोजगार के दस लाख नए अवसर पैदा करना है। राज्य सरकार की एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, ‘गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2022-2028’ को इस तरह तैयार किया गया है कि गुजरात ईएसडीएम गतिविधियों का केंद्र बन सके। इसके तहत निवेशकों को सब्सिडी और छूट की पेशकश की जाएगी। नई नीति के तहत गुजरात में ईएसडीएम क्षेत्र में निवेश करने के इच्छुकों को 20 फीसदी की पूंजीगत व्यय सहायता दी जाएगी जिसकी ऊपरी सीमा 200 करोड़ रुपये है। इसके अलावा पात्र निवेशकों को स्टांप ड्यूटी तथा पंजीयन शुल्क की 100 फीसदी राशि वापस हो जाएगी। विज्ञप्ति के मुताबिक नई नीति में पात्र उद्यमियों को बिजली शुल्क से छूट मिलेगी तथा राज्य सरकार पांच वर्ष की अवधि के लिए एक रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली शुल्क सब्सिडी भी देगी।

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कांग्रेस नेता ने कहा- हिमाचल प्रदेश में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार माफियाओं की सरकार है
National कांग्रेस नेता ने कहा- हिमाचल प्रदेश में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार माफियाओं की सरकार है

कांग्रेस नेता ने कहा- हिमाचल प्रदेश में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार माफियाओं की सरकार है हिमाचल प्रदेश में विपक्षी दल कांग्रेस ने शनिवार को राज्य में जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के खिलाफ एक ‘‘आरोपपत्र’’ जारी किया, जिसमें पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने राज्य की सरकार को ‘‘माफियाओं की सरकार’’ करार दिया। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि आईपीएच विभाग में करोड़ों रुपये का पाइप खरीद घोटाला हुआ और ठाकुर के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान नौकरियां ‘‘बेची गईं’’।

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गुजरात सरकार समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन के लिए समिति बनाएगी
National गुजरात सरकार समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन के लिए समिति बनाएगी

गुजरात सरकार समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन के लिए समिति बनाएगी गुजरात सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया है। सरकार ने शनिवार को यह जानकारी दी। राज्य मंत्रिमंडल की शनिवार को हुई बैठक के दौरान समिति के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। इसे भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली कैबिनेट की आखिरी बैठक माना जा रहा है, क्योंकि राज्य चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा अगले सप्ताह होने की उम्मीद है। गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी और केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने इस फैसले के बारे में पत्रकारों को जानकारी दी।

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मोदी ने कहा- दस लाख नौकरियां देने पर काम कर रही केंद्र सरकार
National मोदी ने कहा- दस लाख नौकरियां देने पर काम कर रही केंद्र सरकार

मोदी ने कहा- दस लाख नौकरियां देने पर काम कर रही केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार दस लाख नौकरियां देने पर काम कर रही है। गुजरात सरकार द्वारा आयोजित ‘रोजगार मेले’ के लिए एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों की संख्या में भी वृद्धि होगी। भाजपा शासित राज्य में विधानसभा चुनावों से पहले आयोजित ‘रोजगार मेले’ में गुजरात पंचायत सेवा बोर्ड की ओर से 5,000 जबकि गुजरात सब इंस्पेक्टर भर्ती बोर्ड और लोकरक्षक भर्ती बोर्ड की ओर से 8,000 नियुक्ति पत्र दिए गए। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने लोगों को नियुक्तिपत्र दिए। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘धनतेरस के पवित्र दिन, हमने राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार मेले का आयोजन किया जहां 75,000 अभ्यर्थियों को नियुक्तिपत्र दिए गए।’’ उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में राष्ट्रीय राजकीय स्तर पर ऐसे मेलों का आयोजन किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आने वाले महीनों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर इस तरह के रोजगार मेलों का आयोजन जारी रहेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार दस लाख नौकरियां देने पर काम कर रही है, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी अभियान से जुड़ रहे हैं।’’ मोदी ने कहा कि युवाओं को दी जाने वाली सरकारी नौकरियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। नव-नियुक्त लोगों से उन्होंने कहा, ‘‘आपकी नियुक्तियों से अभियानों को अंतिम पायदान तक पहुंचाने और सरकारी योजनाओं को विस्तार देने में मदद मिलेगी।’’

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बांग्लादेश के मंत्री बोले- शेख हसीना सरकार हिंदू विरोधी तत्वों पर सख्त
International बांग्लादेश के मंत्री बोले- शेख हसीना सरकार हिंदू विरोधी तत्वों पर सख्त

बांग्लादेश के मंत्री बोले- शेख हसीना सरकार हिंदू विरोधी तत्वों पर सख्त बांग्लादेश के सूचना और प्रसारण मंत्री डॉ हसन महमूद ने कहा कि प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व में सरकार देश में हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाले उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। उन्होंने ये बातें शनिवार को प्रेस क्लब कोलकाता में शुरू हुए चौथे बांग्लादेश फिल्म महोत्सव से इतर एएनआई से विशेष रूप से बात करते हुए की। हाल के वर्षों में, ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां हिंदुओं और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाया गया। 

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गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, चुनाव से ठीक पहले समान नागरिक संहिता को लेकर बनेगी कमेटी
National गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, चुनाव से ठीक पहले समान नागरिक संहिता को लेकर बनेगी कमेटी

गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, चुनाव से ठीक पहले समान नागरिक संहिता को लेकर बनेगी कमेटी विधानसभा चुनाव से पहले गुजरात सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बड़ा फैसला लिया है। गुजरात सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर कमेटी बनाने का फैसला लिया है। आज मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस पर मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही गुजरात चुनाव में भाजपा ने बड़ा दांव खेला है। आज सुबह से ही सूत्रों के हवाले से खबर मिल रही थी कि गुजरात में चुनाव से ठीक पहले भाजपा समान नागरिक संहिता को लेकर बड़ा दांव चल सकती है और ऐसा हो गया है। कैबिनेट में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर प्रस्ताव पास किया गया है। गुजरात में चुनाव से ठीक पहले भाजपा का यह अपने आप में बड़ा कदम है।  इसे भी पढ़ें: गुजरात में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा चार नवंबर को करेंगे : केजरीवाल चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने उत्तराखंड में भी यूनिफॉर्म सिविल कोड वाला दांव खेला था जिसका नतीजा भी उसके पक्ष में आया। उत्तराखंड में भाजपा ने चुनावी जीत हासिल की। इसके बाद एक कमेटी का गठन किया गया था। ठीक ऐसा ही कमेटी अब गुजरात में भी देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि इस कमेटी का अध्यक्ष हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज हो सकते हैं। गुजरात सीएम भूपेंद्र पटेल ने ट्वीट कर कहा कि राज्य में एक समान नागरिक संहिता की आवश्यकता की जांच करने और इस कोड के लिए एक मसौदा तैयार करने के लिए एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट / एचसी न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाने के लिए राज्य कैबिनेट की बैठक में आज एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। गुजरात के गृहमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सीएम भूपेंद्र पटेल ने आज कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए एक समिति बनाई जाएगी।  इसे भी पढ़ें: गुजरात में बोले अशोक गहलोत, फासीवाद में विश्वास करती है भाजपा, चुनाव जीतने के लिए पहनती है लोकतंत्र का मुखौटा आपको बता दें कि गुजरात में हमेशा से भाजपा हिंदुत्व के मुद्दे को आगे रखती रही है। इस बार गुजरात चुनाव में भी भाजपा एक बार फिर से हिंदुत्व के मुद्दे को आगे लाने जा रही है। इसमें यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा काफी बड़ा हो सकता है। 1989 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार समान नागरिक संहिता का मुद्दा उठाया था। इसके बाद से पार्टी लगातार हर चुनाव में इस मुद्दे को अपना एजेंडा बनाती रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव की घोषणा पत्र में भी भाजपा ने समान नागरिक संहिता को शामिल किया था। भाजपा ने साफ तौर पर कहना है कि जब तक इसे अपनाया नहीं जाता, तब तक लैंगिक समानता समाज में नहीं आ सकती। यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब है कि सबके लिए एक तरह का कानून होना चाहिए।Gujarat | Under the leadership of PM Narendra Modi & Union HM Amit Shah, CM Bhupendra Patel has taken a historic decision in the cabinet meeting today - of forming a committee for implementing the Uniform Civil Code in the state: Gujarat Home Minister Harsh Sanghavi pic.

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जापान में व्यापक राहत पैकेज को मंजूरी, 200 अरब डॉलर खर्च करेगी सरकार
Business जापान में व्यापक राहत पैकेज को मंजूरी, 200 अरब डॉलर खर्च करेगी सरकार

जापान में व्यापक राहत पैकेज को मंजूरी, 200 अरब डॉलर खर्च करेगी सरकार जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा की सरकार ने शुक्रवार को एक विशाल आर्थिक पैकेज को मंजूरी दी जिसमें महंगाई को काबू में करने के लिए करीब 200 अरब अमेरिकी डॉलर सरकारी खर्च का प्रावधान भी शामिल है। उम्मीद है कि इस राहत पैकेज से बढ़ती मुद्रास्फीति और खाद्य कीमतों में कमी होगी। दुनिया भर में महंगाई बढ़ने के बीच डॉलर के मुकाबले येन की कीमत में गिरावट आने से जापान में महंगाई तेजी से बढ़ी है। इस राहत पैकेज में परिवारों के लिए सब्सिडी का प्रावधान भी किया गया है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री किशिदा अपनी गिरती लोकप्रियता को फिर से बढ़ाने के लिए ऐसा कदम उठा रहे हैं। किशिदा ने एक संवाददाता सम्मेलन में राहत पैकेज की घोषणा करते हुए कहा, आर्थिक उपायों को बढ़ती कीमतों पर काबू पाने और आर्थिक पुनरुद्धार के लिए इसका खाका तैयार किया गया है। उन्होंने आगे कहा, हम लोगों की जिंदगी, नौकरियों और व्यवसायों की रक्षा करेंगे तथा भविष्य के लिए अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। इसके लिए अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को 4.

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हिंदी को रोजगार की भाषा बनाने की दिशा में योगी सरकार ने की ऐतिहासिक पहल
Politics हिंदी को रोजगार की भाषा बनाने की दिशा में योगी सरकार ने की ऐतिहासिक पहल

हिंदी को रोजगार की भाषा बनाने की दिशा में योगी सरकार ने की ऐतिहासिक पहल मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने हिंदी भाषा में चिकित्सा की पढ़ाई प्रारम्भ करके शिक्षा के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। इस पहल के लिए मुख्यमंत्री शिवराज चौहान की सरहाना की जानी चाहिए। भारत एक विशाल देश है। यहां के विभिन्न राज्यों की अपनी क्षेत्रीय भाषाएं हैं। स्वतंत्रता के पश्चात से ही मातृभाषा को प्रोत्साहित करने की बातें चर्चा में रही हैं, परंतु इनके विकास के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए। इसके कारण प्रत्येक क्षेत्र में विदेशी भाषा अंग्रेजी का वर्चस्व स्थापित हो गया। अब भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने देश के विभिन्न राज्यों की मातृभाषाओं के विकास का बीड़ा उठाया है। इसका प्रारम्भ मध्य प्रदेश से हुआ है। मध्य प्रदेश के पश्चात अब उत्तर प्रदेश में भी चिकित्सा एवं तकनीकी पढ़ाई हिंदी में होगी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने ट्वीट के माध्यम से इसकी घोषणा करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश में मेडिकल और इंजीनियरिंग की कुछ पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद कर दिया गया है। आगामी वर्ष से प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में इन विषयों के पाठ्यक्रम हिंदी में भी पढ़ने के लिए मिलेंगे। उल्लेखनीय है कि गत 16 अक्टूबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भोपाल में चिकित्सा शिक्षा की हिंदी भाषा की तीन पुस्तकों का विमोचन किया। इनमें एमबीबीएस प्रथम वर्ष की एनाटॉमी, फिजियोलॉजी एवं बायो केमिस्ट्री की पुस्तकें सम्मिलित हैं, जिनका हिन्दी में अनुवाद किया गया है। उल्लेख करने योग्य बात यह भी है कि चिकित्सीय शब्दावली को ज्यों का त्यों रखा गया है, क्योंकी संपूर्ण पाठ का हिंदी में अनुवाद करना संभव नहीं है। यदि ऐसा किया जाता है, तो इससे छात्रों के लिए कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। राज्य के 13 राजकीय महाविद्यालयों में हिंदी में चिकित्सा की पढ़ाई प्रारम्भ हो गई है।  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस पहल के लिए शिवराज सरकार को बधाई देते हुए कहा कि आज का दिन शिक्षा के क्षेत्र में नवनिर्माण का दिन है। शिवराज सरकार ने देश में सर्वप्रथम चिकित्सा की हिंदी में पढ़ाई प्रारम्भ करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की इच्छा की पूर्ति की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंदी, तमिल, तेलुगू, मलयालम, गुजराती, बंगाली आदि सभी क्षेत्रीय भाषाओं में चिकित्सा एवं तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने का आह्वान किया था।इसे भी पढ़ें: हिन्दी में उच्च शिक्षा गांव-देहात, गरीब बच्चों के लिए योगी सरकार का तोहफाउन्होंने कहा कि देश के विद्यार्थी जब अपनी भाषा में पढ़ाई करेंगे, तभी वह सच्ची सेवा कर पाएंगे। साथ ही लोगों की समस्याओं को ठीक प्रकार से समझ पाएंगे। चिकित्सा के पश्चात अब 10 राज्यों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई उनकी मातृभाषा में प्रारम्भ होने वाली है। देशभर में आठ भाषाओं में इंजीनियरिंग की पुस्तकों का अनुवाद का कार्य प्रारम्भ हो चुका है और कुछ ही समय में देश के सभी विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में चिकित्सा एवं तकनीकी शिक्षा प्राप्त करना प्रारम्भ करेंगे। मैं देश भर के युवाओं से कहता हूं कि अब भाषा कोई बाध्यता नहीं है। आप इससे बाहर आएं। आपको अपनी मातृभाषा पर गर्व करना चाहिए। अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करके आप अपनी प्रतिभा का और अच्छी तरह प्रदर्शन करने के लिए स्वतंत्र हैं। मातृभाषा में व्यक्ति सोचने, समझने, अनुसंधान, तर्क एवं कार्य और अच्छे ढंग से कर सकता है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि भारतीय छात्र जब मातृभाषा में चिकित्सा और तकनीकी शिक्षा का अध्ययन करेंगे तो भारत विश्व में शिक्षा का बड़ा केन्द्र बन जाएगा। जो लोग मातृभाषा के समर्थक हैं, उनके लिए आज का दिन गौरव का दिन है। उन्होंने नेल्सन मंडेला का स्मरण करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के सोचने की प्रक्रिया अपनी मातृभाषा में ही होती है। नेल्सन मंडेला ने कहा था कि अगर व्यक्ति से उसकी मातृभाषा में बात करें तो वह बात उसके दिल में पहुंचती है।  यह सर्वविदित है कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करना अत्यंत सहज एवं सुगम होता है। अपनी मातृभाषा में विद्यार्थी किसी भी विषय को सरलता से समझ लेता है, जबकि अन्य भाषा में उसे कठिनाई का सामना करना पड़ता है। विश्व भर के शिक्षाविदों ने मातृभाषा में शिक्षा प्रदान किए जाने को महत्व दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार अपनी मातृभाषा में चिकित्सा की पढ़ाई करवाने वाले देशों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था अन्य देशों से अच्छी स्थिति में है। चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस एवं जापान सहित अनेक देश अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। सर्वविदित है कि ये देश लगभग प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी हैं। इन देशों ने अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करके ही उन्नति प्राप्त की है। यदि स्वतंत्रता के पश्चात भारत में भी मातृभाषा में चिकित्सा एवं तकनीकी शिक्षा प्रदान की जाती तो हम भी आज उन्नति के शिखर पर होते।          उल्लेखनीय है कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि हिंदी में चिकित्सा की पढ़ाई प्रारंभ होने से देश में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आएगा। लाखों छात्र अपनी भाषा में अध्ययन कर सकेंगे तथा उनके लिए कई नये अवसरों के द्वार भी खुलेंगे।   निसंदेह ग्रामीण परिवेश एवं मध्यम वर्ग के हिंदी माध्यम में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा एवं तकनीकी पढ़ाई सुगम हो जाएगी, क्योंकि उन्हें चिकित्सा विज्ञान की पुस्तकों में अंग्रेजी भाषा के कठिन शब्द समझने में कठिनाई होती है। चिकित्सा एवं इंजीनियरिग की शिक्षा के पश्चात विज्ञान, वाणिज्य एवं न्याय की शिक्षा भी मातृभाषा में होनी चाहिए। न्यायिक क्षेत्र में सारे कार्य भी मातृभाषा में होने चाहिए। न्यायिक मामलों की कार्यवाही भी मातृभाषा में होनी चाहिए। प्राय : न्यायालयों का सारा कार्य अंग्रेजी में होता है। लोगों को पता नहीं होता कि अधिवक्ता न्यायाधीश से क्या कह रहा है और क्या नहीं। उन्हें कार्यवाही की कोई जानकारी नहीं होती। अपनी मातृभाषा में न्यायिक कार्य होने से लोगों को आसानी हो जाएगी।इसे भी पढ़ें: हिंदी में चिकित्सा की पढ़ाई कराना ऐसा क्रांतिकारी कदम है जिसके दूरगामी परिणाम होंगेकुछ लोग हिंदी में चिकित्सा एवं तकनीकी की पढ़ाई का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि छात्रों को हिंदी में पुस्तकें उपलब्ध नहीं होंगी। वास्तव में यही वे लोग हैं, जो अंग्रेजी का वर्चस्व स्थापित रखने के पक्ष में हैं। ये लोग नहीं चाहते कि भारतीय भाषाएं उन्नति करें। ऐसे लोगों के कारण ही स्वतंत्रता के पश्चात भी अंग्रेजी फलती-फूलती रही तथा भारतीय भाषाओं का विकास अवरुद्ध होता चला गया। वर्तमान में इन विषयों की बहुत सी पाठ्य पुस्तकें हिंदी में उपलब्ध नहीं हैं, किन्तु अभी चिकित्सा एवं तकनीकी पुस्तकों का अनुवाद का कार्य चल रहा है। पाठ्यक्रम की पुस्तकों के अतिरिक्त चिकित्सा से संबंधित अन्य पुस्तकों का अनुवाद का कार्य भी होगा। भविष्य में इन विषयों की पुस्तकों का कोई अभाव नहीं रहेगा। इसलिए पुस्तकों की उपलब्धता के कारण इस नई पहल का विरोध करना उचित नहीं है।        पूर्व में अंग्रेजी भाषा का अच्छा ज्ञान न होने के कारण योग्य एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थी चिकित्सा एवं तकनीकी आदि विषयों की पढ़ाई नहीं कर पाते थे, किन्तु अब भाषा की बाधा दूर हो रही है। अब अंग्रेजी भाषा विद्यार्थियों के सुनहरे भविष्य के आड़े नहीं आएगी। यह देश का दुर्भाग्य है कि हिंदी को देश की राजभाषा घोषित करने पश्चात भी एक राजनीतिक षड्यंत्र के कारण विदेशी भाषा अंग्रेजी में कार्य करने को विशेष महत्व दिया जाता रहा है। अंग्रेजी के कारण हिंदी सहित लगभग सभी भारतीय भाषाएं पिछड़ती चली गईं। ये सब भाषाएं आज भी अपने मान-सम्मान के लिए संघर्ष कर रही हैं। किन्तु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अथक प्रयासों से चिकित्सा एवं तकनीकी पढ़ाई हिंदी में प्रारम्भ होने से यह आशा जगी है कि भारतीय भाषाओं को उनका खोया हुआ मान-सम्मान पुन: प्राप्त हो सकेगा।

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हिन्दी में उच्च शिक्षा गांव-देहात, गरीब बच्चों के लिए योगी सरकार का तोहफा
Column हिन्दी में उच्च शिक्षा गांव-देहात, गरीब बच्चों के लिए योगी सरकार का तोहफा

हिन्दी में उच्च शिक्षा गांव-देहात, गरीब बच्चों के लिए योगी सरकार का तोहफा मध्य प्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी घोषणा की है कि वह भी अपने यहां मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिन्दी में कराने की तैयारी कर रहे हैं। मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने मेडिकल की पढ़ाई हिन्दी में कराये जाने का साहसिक निर्णय लिया है उसका अनुसरण अन्य राज्यों में भी होना जरूरी है। फिलहाल तो मध्य प्रदेश पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां मेडिकल की पढ़ाई हिन्दी में शुरू हो रही है। यह अच्छी बात है कि जब हमारे यहां अपनी मातृ भाषा में पढ़कर डाक्टर इंजीनियर बाहर निकलेंगे तो उनका आम जनता से जुड़ाव भी बेहतर तरीके से हो सकेगा। इसी लिए मध्य प्रदेश सरकार के फैसले का स्वागत हो रहा है। जश्न भी मनाया जा रहा है,लेकिन सवाल यह है कि यह सब तो आजादी के बाद ही हो जाना चाहिए था,इसके लिए 75 वर्षो तक यदि इंतजार करना पड़ा तो इसका जिम्मेदार कौन है। क्या यह सच नहीं है कि 1947 में हमें अंग्रेजों की गुलामी से भले ही आजादी मिल गई थी,लेकिन दो सौ वर्ष की गुलामी का असर आज भी हमारी मानसिकता और रहन-सहन पर हावी है। इसकी सबसे बड़ी कीमत हमारी मातृ भाषा हिन्दी और तमाम राज्यों की क्षेत्रीय भाषाओं को चुकानी पड़ी। निश्चित रूप से आजादी के पश्चात हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए हमारे सिस्टम और उस दौर की सरकारों को भूमिका भी अच्छी नहीं रही होगी,नहीं तो हालात ऐसे नहीं होते। अपने ही देश में हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए जब हिन्दी पखवाड़ा मनाना पड़े तो समझा जा सकता है कि हिन्दी के प्रति हमारी कैसी उदासीनता रही होगी।

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सरकारी प्रोत्साहन की वजह से नवाचार के क्षेत्र में भारत लगा रहा है छलांगें
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सरकारी प्रोत्साहन की वजह से नवाचार के क्षेत्र में भारत लगा रहा है छलांगें भारत दुनिया में नवाचार की दृष्टि से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहा है। संभवतः आजादी के बाद यह पहला अवसर है कि भारत के विकास की दृष्टि से नवाचार (इनोवेशन) के जितने सफल एवं सार्थक प्रयोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे हैं, उतने पूर्व में नहीं हुए हैं। उससे दुनिया में भारत की छवि बदली है एवं प्रतिष्ठा बढ़ी है। दुनिया में तरक्की व प्रगति का बुनियादी आधार नवाचार ही होता है। इस क्षेत्र से भारत के लिए सुखद और गर्व करने योग्य खबर है कि हमने एक बड़ी छलांग लगाई है। एक साल पहले के 46वें स्थान के मुकाबले अब हम 40वें स्थान पर आ गए हैं। सात साल में भारत इनोवेशन का निर्धारण करने वाली ग्लोबल इंडेक्स में 81वें स्थान से उछलकर 40वें पायदान पर पहुंच गया है। शीर्ष स्तर पर एक साल में छह स्थान की एवं सात साल में 41 स्थान की छलांग काफी मायने रखती है, यह एक गर्व करने योग्य उपलब्धि है।

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