Bilawal Bhutto के बयान को भारत ने बताया ‘असभ्य’, MEA ने कहा- 1971 में इस दिन को भूल गए हैं
National Bilawal Bhutto के बयान को भारत ने बताया ‘असभ्य’, MEA ने कहा- 1971 में इस दिन को भूल गए हैं

Bilawal Bhutto के बयान को भारत ने बताया ‘असभ्य’, MEA ने कहा- 1971 में इस दिन को भूल गए हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो के बयान पर बवाल मचा हुआ है। इन सबके बीच बिलावल भुट्टो के बयान पर विदेश मंत्रालय ने अब पाकिस्तान को आईना दिखा दिया है। भारत ने साफ तौर पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री के बयान को 'असभ्य' बताया है। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा है कि लगता है पाकिस्तान के विदेश मंत्री स्पष्ट रूप से 1971 में इस दिन को भूल गए हैं, जो जातीय बंगालियों और हिंदुओं के खिलाफ पाकिस्तानी शासकों द्वारा किए गए नरसंहार का प्रत्यक्ष परिणाम था। साथ ही विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये टिप्पणियां पाकिस्तान के लिए भी एक नया निचला स्तर हैं।  इसे भी पढ़ें: India and Russia: PM Modi ने Putin से की बात, रूस-यूक्रेन जंग के साथ-साथ कई मुद्दो पर हुई चर्चा

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Bilawal Bhutto के बयान को मीनाक्षी लेखी ने बताया बेबुनियाद, बोलीं- यह पाकिस्तान और उनके मानसिक दिवालियेपन को दर्शाता है
National Bilawal Bhutto के बयान को मीनाक्षी लेखी ने बताया बेबुनियाद, बोलीं- यह पाकिस्तान और उनके मानसिक दिवालियेपन को दर्शाता है

Bilawal Bhutto के बयान को मीनाक्षी लेखी ने बताया बेबुनियाद, बोलीं- यह पाकिस्तान और उनके मानसिक दिवालियेपन को दर्शाता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विवादित बयान देकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो चौतरफा घिरते नजर आ रहे हैं। भारत में अब पाकिस्तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होने लगा है। इतना ही नहीं, भाजपा कार्यकर्ताओं ने तो दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया। इन सबके बीच विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी का भी बड़ा बयान आ गया है। मीनाक्षी लेखी ने बिलावल भुट्टो के बयान को पूरी तरीके से बेबुनियाद बताया और कहा कि यह पाकिस्तान और उनके दिवालियेपन को दिखाता है। अपने बयान में मीनाक्षी लेखी ने कहा कि बिलावल भुट्टो ने जिस प्रकार का बेबुनियाद बयान दिया है वो पाकिस्तान और उनके मानसिक दिवालियेपन को दर्शाता है।  इसे भी पढ़ें: Delhi में PAK उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन, अनुराग ठाकुर बोले- पाकिस्तान की हरकतों और मंसूबों को दुनिया देख चुकी है

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S Jaishankar ने लगाई लताड़ तो बौखलाया पाकिस्तान, पीएम मोदी के खिलाफ बिलावल भुट्टो ने कर दी अपमानजनक टिप्पणी
International S Jaishankar ने लगाई लताड़ तो बौखलाया पाकिस्तान, पीएम मोदी के खिलाफ बिलावल भुट्टो ने कर दी अपमानजनक टिप्पणी

S Jaishankar ने लगाई लताड़ तो बौखलाया पाकिस्तान, पीएम मोदी के खिलाफ बिलावल भुट्टो ने कर दी अपमानजनक टिप्पणी जम्मू कश्मीर को लेकर पाकिस्तान हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग करने की कोशिश करता है। पाकिस्तान भारत के खिलाफ नापाक साजिश भी रचता है। यही कारण है कि हाल में ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को आईना दिखाया था। इसके बाद पाकिस्तान को इतनी मिर्ची लग गई कि उसके विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। बिलावल भुट्टो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निजी टिप्पणी करते हुए कहा कि मैं भारत को बताना चाहता हूं कि ओसामा बिन लादेन तो मर चुका है लेकिन गुजरात का कसाई अभी जिंदा है जो भारत का प्रधानमंत्री हैं। पाकिस्तान ने मर्यादाओं की सारी हदें लांघ दी।  इसे भी पढ़ें: United Nations: एस.

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कीड़ों को भी होता है दर्द का एहसास : पशु कल्याण कानूनों के लिए इसका क्या मतलब है
International कीड़ों को भी होता है दर्द का एहसास : पशु कल्याण कानूनों के लिए इसका क्या मतलब है

कीड़ों को भी होता है दर्द का एहसास : पशु कल्याण कानूनों के लिए इसका क्या मतलब है भोजन और पशु आहार के लिए सालाना कम से कम एक खरब कीड़े मारे जाते हैं। उन्हें मारने की नियमित विधियों में अत्यधिक गर्मी और ठंड शामिल होती है, जो अकसर उन्हें भूखा रखने से पहले होती है। इसके मुकाबले, हर वर्ष केवल लगभग 79 अरब स्तनधारियों और पक्षी पशुओं का वध किया जाता है। विद्वानों ने लंबे समय से माना है कई जानवर पीड़ा का अनुभव करते हैं, लेकिन कीड़ों के अपवाद के साथ। लेकिन हमने 300 से अधिक वैज्ञानिक अध्ययनों का सर्वेक्षण किया और पाया कि कम से कम कुछ कीड़े दर्द महसूस करते हैं। इस बीच, अन्य कीड़ों का अभी तक पर्याप्त विस्तार से अध्ययन नहीं किया गया है। हमने संभावित रूप से हानिकारक उत्तेजनाओं के प्रति भौंरों की प्रतिक्रिया में अपना स्वयं का अध्ययन भी किया। जिस तरह से उन्होंने उत्तेजनाओं पर प्रतिक्रिया की वह मनुष्यों और अन्य जानवरों में दर्द प्रतिक्रियाओं के समान थी। कीटनाशक हर साल खरबों जंगली कीड़ों को मारते हैं। मृत्यु का वास्तविक कारण अक्सर पक्षाघात, श्वासावरोध या आंतरिक अंगों का घुलना होता है, कभी-कभी कई दिनों तक। अगर कीड़ों को दर्द महसूस होता है, तो कीट पालन और कीट नियंत्रण से उन्हें बड़े पैमाने पर पीड़ा होती होगी। फिर भी पशु कल्याण बहस और कानून लगभग सार्वभौमिक रूप से कीड़ों की उपेक्षा करते हैं। एक कारण यह है कि, अमूमन कीड़ों को अक्सर बहुत ही कम जीवनकाल के साथ बहुत सरल रूप में देखा जाता था। लेकिन इस बात के प्रमाण जमा हो रहे हैं कि कीड़े दर्द महसूस करते हैं। कीड़ों को दर्द महसूस होता है या नहीं, इस सवाल का जवाब देना मुश्किल है। दर्द एक स्वाभाविक निजी अनुभव है। दर्द का निदान करने में कठिनाई तब होती है जब जिसके बारे में बात की जा रही है, वह बता नहीं सकता, तो सर्जरी के दौरान शिशुओं के अपेक्षाकृत हाल के उपचार से इसका उदाहरण मिलता है। 1980 के दशक तक, कई सर्जनों का मानना ​​था कि बच्चे दर्द महसूस नहीं कर सकते हैं और उनपर शायद ही कभी एनेस्थेटिक्स का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि बच्चों की स्पष्ट प्रतिक्रियाएं, जैसे कि चीखना और छटपटाना, सिर्फ सजगता का प्रतीक होती हैं। भले ही हमारे पास अभी भी सबूत नहीं है कि बच्चे दर्द महसूस करते हैं, अब ज्यादातर स्वीकार करते हैं कि यह लगभग निश्चित है कि वह दर्द का अनुभव करते हैं। किसी भी प्राणी के लिए जो अपनी पीड़ा के बारे में सीधे बता नहीं सकता, हमें सामान्य ज्ञान और संभावना पर भरोसा करने की आवश्यकता है। जितने अधिक दर्द संकेतक पाए जाते हैं, संभावना उतनी ही अधिक होती है। जानवरों में सुसंगत मानदंड का उपयोग करना महत्वपूर्ण है, और कीड़ों में दर्द के समान व्यवहारिक संकेतकों को देखने के लिए वही मानदंड होना चाहिए जैसा कि एक गाय या पालतू कुत्ते में इस्तेमाल होता है। मस्तिष्क में दर्द अधिकांश जानवर हानिकारक उत्तेजनाओं के परिणामस्वरूप अचानक दर्द होने पर प्रतिक्रिया प्रदर्शित करते हैं। वैज्ञानिक लंबे समय से जानते हैं कि कीट प्रतिक्रिया प्रदर्शित करते हैं। हालांकि, अगर किसी जानवर को संभावित रूप से हानिकारक उत्तेजनाओं का पता लगता है, तो यह जरूरी नहीं कि उन्हें इनसानों की तरह आउच-जैसी प्रतिक्रिया हो, जो अमूमन मस्तिष्क में दर्द का एहसास पहुंचने पर होती है। एहसास और दर्द दोनों कुछ हद तक एक दूसरे से स्वतंत्र रूप से हो सकते हैं। अन्य दर्द संकेतक अलग-अलग कीड़ों में दर्द के साक्ष्य का मूल्यांकन करने के लिए हमने जिस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया, वह वही थी जिसके आधार पर हाल ही में यूके सरकार ने दो अन्य प्रमुख अकशेरूकीय समूहों, डिकापोड क्रस्टेशियन (केकड़ों, झींगा मछलियों और झींगे सहित) और सेफलोपोड्स (ऑक्टोपस और स्क्वीड सहित) में दर्द की पहचान की ओर उन्हें पशु कल्याण (संवेदना) अधिनियम 2022 में शामिल किया। इस प्रक्रिया में आठ मानदंड हैं, जो यह आकलन करते हैं कि क्या जानवर का तंत्रिका तंत्र दर्द की पहचान कर सकता हैऔर क्या उसका व्यवहार दर्द का एहसास होने का संकेत देता है। मक्खियाँ और तिलचट्टे इनमें से छह मानदंडों को पूरा करते हैं। प्रक्रिया के अनुसार, यह दर्द के लिए मजबूत सबूत है। अन्य कीड़ों में कमजोर सबूत के बावजूद, कई अभी भी दर्द के लिए पर्याप्त सबूत दिखाते हैं। मधुमक्खियाँ, ततैया और चींटियाँ चार मानदंडों को पूरा करती हैं, जबकि तितलियाँ, पतंगे, झींगुर और टिड्डे तीन को पूरा करते हैं।

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‘मिशन 2024’ में जीत की गारंटी बनेगा ‘समान नागरिक संहिता’ कानून
Column ‘मिशन 2024’ में जीत की गारंटी बनेगा ‘समान नागरिक संहिता’ कानून

‘मिशन 2024’ में जीत की गारंटी बनेगा ‘समान नागरिक संहिता’ कानून सुप्रीम कोर्ट और कई हाईकोर्ट काफी समय से अपने तमाम फैसलों के दौरान केंद्र सरकार से समान नागरिक संहिता लाने के लिए कह रहे थे। यह बात तो सबको पता थी, लेकिन केंद्र सरकार कानून बनाने की राह क्यों नहीं पकड़ रही थी, यह बात कम ही लोगों को समझ में आ रही थी। परंतु राज्यसभा में भाजपा के एक वरिष्ठ सांसद की ओर से निजी स्तर पर समान नागरिक संहिता विधेयक (यूसीसी) प्रस्तुत करके समान नागरिक संहिता पर गरम बहस छेड़ दी गयी है। यूसीसी का राज्यसभा में जैसा विरोध हुआ, उसका औचित्य समझना कठिन है, क्योंकि हमारे संविधान में भी समान नागरिक संहिता को आवश्यक बताया गया था।। इसके बाद भी यूसीसी का विरोध यही बताता है कि विपक्षी दल समान नागरिक संहिता पर बहस करने के लिए भी तैयार नहीं हैं। आखिर जिस समान नागरिक संहिता का उल्लेख संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में है, उस पर संसद में बहस क्यों नहीं हो सकती और वह भी तब, जब निजी विधेयक पेश करने की एक परंपरा है?

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जापान ने धार्मिक समूह ‘यूनिफिकेशन चर्च’ के दानदाताओं के लिए बनाया कानून
International जापान ने धार्मिक समूह ‘यूनिफिकेशन चर्च’ के दानदाताओं के लिए बनाया कानून

जापान ने धार्मिक समूह ‘यूनिफिकेशन चर्च’ के दानदाताओं के लिए बनाया कानून जापान की संसद ने धार्मिक और अन्य समूहों द्वारा दुर्भावनापूर्ण दान अनुरोधों को प्रतिबंधित करने के लिए शनिवार को एक कानून बनाया, जो मुख्य रूप से धार्मिक समूह ‘यूनिफिकेशन चर्च’ को लक्षित करता है। ‘यूनिफिकेशन चर्च’ की धन उगाहने की रणनीति और सत्तारूढ़ दल के साथ उसके मधुर संबंध के कारण काफी आलोचना हुई थी। जुलाई में पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या के बाद जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ दक्षिण कोरियाई-आधारित धार्मिक समूह ‘यूनिफिकेशन चर्च’ के दशकों पुराने संबंध सामने आए। प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने प्रकरण पर जनता के रोष को शांत करने की कोशिश की और तीन कैबिनेट मंत्रियों को बदल दिया। इस साल के समापन संसदीय सत्र में स्वीकृत नया कानून, मतावलंबियों अन्य दाताओं और उनके परिवारों को अपने धन की वापसी की मांग करने की अनुमति देता है और धार्मिक समूहों और अन्य संगठनों को जबरदस्ती, धमकियों या दान को आध्यात्मिक मुक्ति से जोड़कर धन मांगने से रोकता है। इस मामले में लोगों के अनुभव सुन चुके किशिदा ने उनके कष्टों को ‘‘भयानक’’ बताया और पीड़ितों तथा उनके परिवारों की मदद के लिए पारित कानून की प्रशंसा की। यह कानून लाना किशिदा की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक था।

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Babri Demolition | बाबरी विध्वंस के आरोपियों को बरी करने के निर्णय को चुनौती देगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
National Babri Demolition | बाबरी विध्वंस के आरोपियों को बरी करने के निर्णय को चुनौती देगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

Babri Demolition | बाबरी विध्वंस के आरोपियों को बरी करने के निर्णय को चुनौती देगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अयोध्या (उत्तर प्रदेश)। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले के आरोपियों को बरी किए जाने के विशेष सीबीआई अदालत के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल में अयोध्या के निवासियों हाजी महबूब और सैयद अखलाक द्वारा बाबरी विध्वंस मामले में सीबीआई अदालत के फैसले के पुनरीक्षण की याचिका खारिज कर दी थी।

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एक समुदाय को धार्मिक कानून से कई ऐसे अधिकार मिले हैं जो मानवता के विपरीत हैं
Column एक समुदाय को धार्मिक कानून से कई ऐसे अधिकार मिले हैं जो मानवता के विपरीत हैं

एक समुदाय को धार्मिक कानून से कई ऐसे अधिकार मिले हैं जो मानवता के विपरीत हैं आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे भारत देश के सभी धर्मों के नागरिकों के लिये एक समान धर्मनिरपेक्ष कानून होना चाहिये। संविधान के संस्थापकों ने राज्य के नीति निदेशक तत्त्व के माध्यम से इसको लागू करने की ज़िम्मेदारी बाद की सरकारों को हस्तांतरित कर दी थी। लेकिन पूर्व की सरकारों ने वोट बैंक के चलते समान नागरिक संहिता को लागू नहीं होने दिया, अब भारतीय जनता पार्टी एवं नरेन्द्र मोदी सरकार इस बड़ी विसंगति को दूर करने के लिये तत्पर हुई है, जिसके लागू होने से देश सशक्त होगा। विडम्बना है कि मुस्लिम समुदाय को उनके शरीयत कानून से अनेक ऐसे अधिकार मिले हुए हैं, जो मानवता के विपरीत हैं और मानव मूल्यों एवं भारत के संविधान का हनन है। यह कानून एक मुस्लिम पुरुष को अपनी मौजूदा पत्नियों की सहमति के बिना चार विवाह करने की अनुमति देता है, वहीं बाल-विवाह एवं यौन शोषण को जायज मानता है। जबकि देश में बाल विवाह कानूनन अपराध है। केरल हाईकोर्ट ने एक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए समान कानून संहिता को लागू किया है।

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बिलावल भुट्टो का बड़ा बयान, 1971 में भारत से मिली हार पाकिस्तानी सेना की विफलता
International बिलावल भुट्टो का बड़ा बयान, 1971 में भारत से मिली हार पाकिस्तानी सेना की विफलता

बिलावल भुट्टो का बड़ा बयान, 1971 में भारत से मिली हार पाकिस्तानी सेना की विफलता कराची। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा है कि 1971 में पूर्वी पाकिस्तान को लेकर हुई लड़ाई में भारतीय सेना से मिली शर्मनाक हार पाकिस्तानी सेना की बड़ी विफलता थी। उन्होंने यह टिप्पणी पाकिस्तानी सेना के पूर्व प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा पर निशाना साधते हुए की जिन्होंने भारत से मिली हार को पाकिस्तान की ‘‘राजनीतिक विफलता’’ करार दिया था। बिलावल ने यह टिप्पणी अपनी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के 55वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में निश्तार पार्क में आयोजित एक रैली में की। पीपीपी के अध्यक्ष ने इस अवसर पर अपनी पार्टी के इतिहास की चर्चा की और इसके संस्थापक एवं अपने नाना जुल्फिकार अली भुट्टो की ‘‘उपलब्धियों’’ को याद किया। डॉन अखबार ने उनके हवाले से कहा, ‘‘जब जुल्फिकार अली भुट्टो ने सत्ता संभाली, उस समय लोगों की उम्मीदें टूटी हुई थीं और वे हर तरह से निराश थे।’’  इसे भी पढ़ें: भारत जैसा दोस्त बनने का था ख्वाब, मॉस्को ने दिखा दी औकात, पाकिस्तान ने इंडिया की तरह मांगा डिस्काउंट, रूस ने कहा- Don't angry me

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न्यायपालिका पर कानून मंत्री की टिप्पणी को लेकर भड़के हरीश साल्वे, कहा- किरण रिजिजू ने पार की ‘लक्ष्मण रेखा’
National न्यायपालिका पर कानून मंत्री की टिप्पणी को लेकर भड़के हरीश साल्वे, कहा- किरण रिजिजू ने पार की ‘लक्ष्मण रेखा’

न्यायपालिका पर कानून मंत्री की टिप्पणी को लेकर भड़के हरीश साल्वे, कहा- किरण रिजिजू ने पार की ‘लक्ष्मण रेखा’ कॉलेजियम के कामकाज को लेकर सरकार और न्यायपालिका के बीच गतिरोध पर किरेन रिजिजू की हालिया टिप्पणी पर अपनी अस्वीकृति व्यक्त करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि केंद्रीय कानून मंत्री ने 'लक्ष्मण रेखा' पार कर ली है। बार एंड बेंच से बात करते हुए वरिष्ठ वकील साल्वे ने कहा कि मेरी राय में कानून मंत्री ने जो कहा, वो लक्ष्मण रेखा पार करने सरीखा था। अगर वह सोचते हैं कि सुप्रीम कोर्ट को खुले तौर पर असंवैधानिक कानून को देखते हुए अपनी आंखे मूंद लेनी चाहिए और उस कानून में संशोधन करने के लिए सरकार की दया पर निर्भर रहना चाहिए, तो खेद के साथ कहूंगा कि ये गलत है।इसे भी पढ़ें: MMRCL को सुप्रीम कोर्ट से राहत, आरे कॉलोनी में 84 पेड़ काटने की अर्जी देने को मिली SC से मंजूरीइसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम पर उनकी राय के बारे में पूछे जाने पर, साल्वे ने कहा कि वह व्यवस्था के आलोचक बने हुए हैं। कानून मंत्री रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट के इस अवलोकन की आलोचना की थी कि सरकार कॉलेजियम द्वारा स्वीकृत न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित फाइलों को अटका कर बैठी है। उन्होंने कहा कि “कभी मत कहना कि सरकार फाइलों पर बैठी है, फिर फाइलें सरकार को नहीं भेजी जाए, आप खुद की नियुक्त करो, खुद शो चलाओ। उन्होंने कॉलेजियम प्रणाली को संविधान के लिए "

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गैंगस्टर-आतंकवादी गठजोड़ मामले में लॉरेंस बिश्नोई के ठिकानों पर NIA की रेड, 20 स्थानों पर मारे गये छापे
National गैंगस्टर-आतंकवादी गठजोड़ मामले में लॉरेंस बिश्नोई के ठिकानों पर NIA की रेड, 20 स्थानों पर मारे गये छापे

गैंगस्टर-आतंकवादी गठजोड़ मामले में लॉरेंस बिश्नोई के ठिकानों पर NIA की रेड, 20 स्थानों पर मारे गये छापे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गैंगस्टर-आतंकवादी सांठगांठ मामले की जांच के तहत दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में 20 स्थानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। लॉरेंस बिश्नोई, नीरज बवाना और टिल्लू ताजपुरिया सहित छह गैंगस्टरों से पूछताछ के बाद आतंकवाद-रोधी एजेंसी की कार्रवाई सामने आई है।

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जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर आया गिरिराज सिंह का बयान, कहा देश के विकास के लिए विधेयक जरूरी
National जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर आया गिरिराज सिंह का बयान, कहा देश के विकास के लिए विधेयक जरूरी

जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर आया गिरिराज सिंह का बयान, कहा देश के विकास के लिए विधेयक जरूरी भाजपा नेता गिरिराज सिंह आमतौर पर अपने बयानों के चलते चर्चा में बने रहते है। अब गिरिराज सिंह ने एक बार फिर से अहम मुद्दे पर बयान देकर सुर्खियां बटोरी है। जनसंख्या नियंत्रण विधेयक को लेकर अब भाजपा नेता गिरिराज सिंह का बड़ा बयान आया है। बढ़ती जनसंख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के लिए जनसंख्या नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे पास संसाधन सीमित मात्रा में ही है। उन्होंने कहा कि अगर भारत तेजी से विकास करना चाहता है तो ये जरूरी है कि जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाया जाए। दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित जनसंख्या नियंत्रण रैली के दौरान उन्होंने कहा कि देश में ये कानून नहीं बना तो देश में सामाजिक समरसता और एकता नहीं बचेगी। देश का विकास करने के लिए इस कानून का होना बेहद अहम है। उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 1978 से पहले चीन की जीडीपी भारत से कम थी, मगर आज चीन भारत से विकसित है, क्योंकि यहां वन चाइल्ड पॉलिसी लागू है। उन्होंने कहा कि चीन में एक मिनट में 10 बच्चे पैदा होते हैं जबकि भारत में एक मिनट में 30 बच्चे पैदा होते है। अगर हमारे देश की जनसंख्या ऐसे ही तीन गुणा तेजी से बढ़ती रही तो हमारे लिए चीन का मुकाबला करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ये एक महत्वपूर्ण विषय है। ये समझना बेहद जरूरी है कि हमारे पास संसाधन बेहद सीमित है। इनका उपयोग सही दिशा में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कानून को जनसंख्या बिल देश के सभी धर्म संप्रदायों के लोगों पर लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को लाकर पूरे देश में समान रूप से इसे लागू करना चाहिए। जो भी इस कानून का पालन नहीं करेगा उसे सरकारी योजनाओं का लाभ ना देते हुए बेदखल करना चाहिए। ऐसे लोगों से वोटिंग का अधिकार भी सरकार को छिन लेना चाहिए।

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राजस्थान: एंबुलेंस का डीजल खत्म, जान बचाने के लिए 1 KM तक बेटी-दामाद ने दिया धक्का, मरीज की सड़क पर मौत
National राजस्थान: एंबुलेंस का डीजल खत्म, जान बचाने के लिए 1 KM तक बेटी-दामाद ने दिया धक्का, मरीज की सड़क पर मौत

राजस्थान: एंबुलेंस का डीजल खत्म, जान बचाने के लिए 1 KM तक बेटी-दामाद ने दिया धक्का, मरीज की सड़क पर मौत राजस्थान के बांसवाड़ा में एक एंबुलेंस में पेट्रोल खत्म होने के कारण मरीज की एम्बुलेंस में कथित तौर पर मृत्यु हो गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। राजस्थान सरकार में मंत्री प्रताप सिंह खचरियावास ने कहा कि अगर एंबुलेंस में पेट्रोल खत्म हो गया और मरीज़ की मृत्यु हो गई है तो यह व्यवस्था की असफलता नहीं है बल्कि प्रबंधन की असफलता है। जो भी व्यक्ति इसके ख़िलाफ ज़िम्मेदार हैं उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।इसे भी पढ़ें: राजस्थान में काम के बदले पैसे मांगने पर दलित युवक की पिटाई, पेशाब पीने को किया मजबूरबांसवाड़ा सीएमएचओ हीरालाल ताबियार ने कहा कि मामले में जांच शुरू कर दी गई है। 108 एंबुलेंसों को एक निजी एजेंसी द्वारा संचालित किया जाता है,एजेंसी राज्य सरकार द्वारा अधिकृत है और कंपनी के ऊपर एंबुलेंस के रखरखाव का ज़िम्मा होता है। कहां लापरवाही रही है यह जांच के बाद सामने आएगा।इसे भी पढ़ें: भारत जोड़ो यात्रा की तैयारियों के लिए राजस्थान जाएंगे केसी वेणुगोपाल, गहलोत-पायलट विवाद पर कही यह बातमीडिया रिपोर्ट के अनुसार तेजिया गणना उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के रहने वाले थे। उनकी बेटी की शादी बांसवाड़ा के दानापुर में हुई। वे करीब तीन महीने पहले अपनी बेटी के घर आए थे। अचानक वे खेत में  बेहोश होकर गिर गए थे।  

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वैष्णव ने कहा कि प्रस्तावित कानून नए डेटा संरक्षण बोर्ड को स्वतंत्रता देगा
Business वैष्णव ने कहा कि प्रस्तावित कानून नए डेटा संरक्षण बोर्ड को स्वतंत्रता देगा

वैष्णव ने कहा कि प्रस्तावित कानून नए डेटा संरक्षण बोर्ड को स्वतंत्रता देगा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बृहस्पतिवार को कहा कि रिजर्व बैंक और सेबी की तरह नए आंकड़ा संरक्षण बोर्ड की स्वायत्तता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने सरकार द्वारा आंकड़ा संरक्षण विधेयक के मसौदे में प्रस्तावित निगरानी निकाय की स्वतंत्रता को लेकर जताई जा रही चिंताओं को दूर करते हुए यह बात कही। वैष्णव ने ‘टाइम्स नाउ समिट 2022’ में डिजिटल व्यक्तिगत आंकड़ा संरक्षण (डीपीडीपी) विधेयक के मसौदे और निगरानी से जुड़े सवालों पर हो रही आलोचना का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इसमें आतंकवादी खतरों और साइबर खतरों के साथ ही वैश्विक युद्ध की बदलती प्रकृति को भी ध्यान में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इन वास्तविकताओं पर विचार करना होगा और एक संतुलित नजरिया अपनाना होगा। प्रस्तावित आंकड़ा संरक्षण बोर्ड कितना स्वतंत्र होगा, इस सवाल के जवाब में वैष्णव ने कहा कि स्वतंत्रता और स्वायत्तता कानून से आती है। उन्होंने दुनिया भर में आरबीआई, सेबी की प्रतिष्ठा का हवाला देते हुए कहा कि मसौदा आंकड़ा संरक्षण विधेयक में इस बात का साफ उल्लेख किया गया है कि प्रस्तावित आंकड़ा संरक्षण बोर्ड स्वतंत्र होगा और एक तय तरीके से काम करेगा।

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ट्रंप के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाने वाली लेखिका ने नया मुकदमा दायर किया
International ट्रंप के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाने वाली लेखिका ने नया मुकदमा दायर किया

ट्रंप के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाने वाली लेखिका ने नया मुकदमा दायर किया अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर 1990 में बलात्कार का आरोप लगाने वाली एक लेखिका ने बृहस्पतिवार को यहां उनके खिलाफ नया मुकदमा दायर किया। राज्य में लागू हुए एक नए कानून के तहत यौन हिंसा पीड़ितों को दशकों पहले हुए अपराधों के खिलाफ भी मामला दायर कराने की अनुमति दी गई है। इस कानून के लागू होने के कुछ ही मिनट बाद लेखिका ई.

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यूरोपीय सांसदों ने रूस को आतंकवाद का प्रायोजक देश घोषित किया, जानिए क्या हैं इसके मायने?
International यूरोपीय सांसदों ने रूस को आतंकवाद का प्रायोजक देश घोषित किया, जानिए क्या हैं इसके मायने?

यूरोपीय सांसदों ने रूस को आतंकवाद का प्रायोजक देश घोषित किया, जानिए क्या हैं इसके मायने?

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Data Protection Bill: कंसेंट मैनेजर का प्रावधान, महिलाओं पर विशेष ध्यान, नए नियमों से कितना सेफ रहेगा हमारा डेटा, अन्य देशों की तुलना में कैसे अलग?
Mri Data Protection Bill: कंसेंट मैनेजर का प्रावधान, महिलाओं पर विशेष ध्यान, नए नियमों से कितना सेफ रहेगा हमारा डेटा, अन्य देशों की तुलना में कैसे अलग?

Data Protection Bill: कंसेंट मैनेजर का प्रावधान, महिलाओं पर विशेष ध्यान, नए नियमों से कितना सेफ रहेगा हमारा डेटा, अन्य देशों की तुलना में कैसे अलग?

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अदालत का सवाल सही है, आखिर 72 साल में भी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का कानून क्यों नहीं बना?
Column अदालत का सवाल सही है, आखिर 72 साल में भी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का कानून क्यों नहीं बना?

अदालत का सवाल सही है, आखिर 72 साल में भी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का कानून क्यों नहीं बना?

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देश को ‘लव जिहाद’ के खिलाफ सख्त कानून की जरूरत, गुजरात की जनसभा में असम के CM ने श्रद्धा मर्डर केस का जिक्र करते हुए कही ये बात
National देश को ‘लव जिहाद’ के खिलाफ सख्त कानून की जरूरत, गुजरात की जनसभा में असम के CM ने श्रद्धा मर्डर केस का जिक्र करते हुए कही ये बात

देश को ‘लव जिहाद’ के खिलाफ सख्त कानून की जरूरत, गुजरात की जनसभा में असम के CM ने श्रद्धा मर्डर केस का जिक्र करते हुए कही ये बात असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा सरमा ने गुजरात के धनसूरा में कहा कि एक व्यक्ति देश में 2-3 शादी कर लेता है, आप क्यों करेंगे इतनी शादी। देश में अगर हिंदू 1 शादी करता है तो बाकि धर्म के लोगों को भी 1 ही शादी करनी पड़ेगी। इसलिए मैं आज ये बोलता हूं कि देश को समान नागरिक संहिता कानून चाहिए। महिलाओं का सम्मान होना चाहिए। घर में अगर 1 बेटा और 1 बेटी है तो दोनों को एक समान अधिकार मिलना चाहिए। देश में समान नागरिक संहिता चाहिए और ये केवल भाजपा ला सकती है, कांग्रेस नहीं। इसे भी पढ़ें: Kaun Banega Gujaratna Sardar: Gujarat में BJP ने झोंकी पूरी ताकत, Nadda और Amit Shah ने किया प्रचारश्रद्धा मर्डर केस का जिक्र करते हुए हेमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि आफताब ने शारदा को मार डाला और उसके शरीर के 35 टुकड़े कर दिए। जब पुलिस ने पूछा कि वह केवल हिंदू लड़कियों को क्यों लाया, तो उसने कहा कि उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वे भावुक हैं। अन्य आफताब-श्रद्धा भी हैं, देश को 'लव जिहाद' के खिलाफ सख्त कानून की जरूरत है। असम के मुख्यमंत्री ने कहा, ''आफताब श्रद्धा बहन को मुंबई से ले आया और लव जिहाद के नाम पर उसके 35 टुकड़े कर दिए। और शव को कहां रखा?

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आईपीसी के दायरे में आने वाले अपराधों को जीएसटी कानून से बाहर किया जाएगा
Business आईपीसी के दायरे में आने वाले अपराधों को जीएसटी कानून से बाहर किया जाएगा

आईपीसी के दायरे में आने वाले अपराधों को जीएसटी कानून से बाहर किया जाएगा माल एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिनियम को करदाताओं के लिए और सुगम बनाने के लिए सरकार ऐसे दंडात्मक अपराधों को इससे हटाने पर विचार कर रही है जो भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के दायरे में पहले से ही आते हैं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। यह प्रस्ताव जीएसटी कानून के दायरे से कुछ अपराधों को बाहर करने की कवायद के तहत लाया गया है और जीएसटी परिषद की अगली बैठक में इसे रखे जाने की संभावना है। प्रस्ताव को जीएसटी परिषद की मंजूरी मिल जाती है तो वित्त मंत्रालय जीएसटी कानून में संशोधन का प्रस्ताव देगा जिसे अगले महीने से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में रखा जाएगा।

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