विवादास्पद आतंकवाद-रोधी कानून को रद्द करने पर विचार कर रहा है श्रीलंका
International विवादास्पद आतंकवाद-रोधी कानून को रद्द करने पर विचार कर रहा है श्रीलंका

विवादास्पद आतंकवाद-रोधी कानून को रद्द करने पर विचार कर रहा है श्रीलंका श्रीलंका सरकार विवादास्पद आतंकवाद रोकथाम कानून (पीटीए) की जगह नये आतंकवाद-रोधी कानून का मसौदा तैयार कर रही है। न्याय मंत्री विजयदास राजपक्षे ने रविवार को यह जानकारी दी। पीटीए को तमिल अल्पसंख्यक चरमपंथी समूहों की हिंसा का मुकाबला करने के लिए वर्ष 1979 में एक अस्थायी व्यवस्था के रूप में पेश किया गया था। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों और तमिल पक्षकारों ने इसे एक कठोर कानून करार दिया है, जिसके तहत अदालतों में आरोपपत्र दायर किए बिना दशकों तक तमिलों को हिरासत में रखा गया। कैंडी जिले में पत्रकारों को संबोधित करते हुए राजपक्षे ने कहा, ‘‘विशेषज्ञों के एक समूह द्वारा गहन पड़ताल के बाद एक नए अधिनियम का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया जारी है।’’ मंत्री ने कहा, ‘‘हम आतंकवाद-रोधी कानून लाने के इच्छुक हैं ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।’’ यूरोपीय संघ (ईयू) ने श्रीलंका सरकार पर पीटीए को निरस्त करने का दबाव डाला था।

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रीजीजू ने कॉलेजियम की सिफारिश पर वकीलों के प्रदर्शन से असहमति जतायी
National रीजीजू ने कॉलेजियम की सिफारिश पर वकीलों के प्रदर्शन से असहमति जतायी

रीजीजू ने कॉलेजियम की सिफारिश पर वकीलों के प्रदर्शन से असहमति जतायी कानून मंत्री किरण रीजीजू ने उच्च न्यायालय के कुछ न्यायाधीशों की स्थानांतरण संबंधी उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिशों के विरुद्ध कुछ वकील निकायों के प्रदर्शन से शनिवार को असहमति जतायी। यहां नवनियुक्त प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए रीजीजू ने कहा कि यदि कॉलेजियम के हर फैसले के लिए हड़ताल आए दिन की परिघटना बन जाती है तो ‘ यह कहां जाएगी।’’ गुजरात, तेलंगाना और मद्रास बार निकायों ने कुछ न्यायाधीशों का स्थानांतरण करने के कॉलेजियम के फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया था। रीजीजू ने कहा, ‘‘ कल मैंने सुना कि कुछ वकील स्थानांतरण के मामले को लेकर प्रधान न्यायाधीश से मिलना चाहते हैं। अब भले ही यह मुद्दा हो, लेकिन यदि आप अलग से देखें तो यह कई मुद्दों में एक मुद्दा हो। लेकिन यदि यह कॉलेजियम के हर फैसले, जिसका सरकार समर्थन करती रहती है, पर बार-बार होने वाली घटना हो जाए तो यह कहां ले जाएगी। ऐसे में, पूरा आयाम ही बदल जाएगा।’’ प्रधान न्यायाधीश गुजरात हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से उसके वकीलों के वर्तमान प्रदर्शन के मद्देनजर 21 नवंबर को मिलने को तैयार हो गये हैं। ये वकील न्यायमूर्ति निखिल एस कारियल का पटना उच्च न्यायालय में तबादला किये जाने की कॉलेजियम की सिफारिश का विरोध कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कॉलेजियम ने हाल में उच्च न्यायालयों के तीन न्यायाधीशों का प्रशासनिक कारणों से तबादला करने की सिफारिश की है।

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Prabhasakshi NewsRoom: सत्येंद्र जैन कहने को आम आदमी पार्टी के नेता हैं, जेल में हो रही है VIP खातिरदारी
National Prabhasakshi NewsRoom: सत्येंद्र जैन कहने को आम आदमी पार्टी के नेता हैं, जेल में हो रही है VIP खातिरदारी

Prabhasakshi NewsRoom: सत्येंद्र जैन कहने को आम आदमी पार्टी के नेता हैं, जेल में हो रही है VIP खातिरदारी दिल्ली सरकार के जेल में बंद मंत्री सत्येंद्र जैन का मसाज लेते हुए एक वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठे हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों में जेल में बंद मंत्री को आम कैदियों की तरह क्यों नहीं रखा जा रहा है। एक मंत्री यदि जेल में होते हुए बिसलेरी का पानी पिये, उसको मसाज देने के लिए दो तीन लोगों को स्टाफ मौजूद रहे तो सवाल उठेगा कि यह जेल है या रिसॉर्ट। कहने को सत्येंद्र जैन आम आदमी पार्टी के नेता हैं लेकिन देखिये वीडियो में कैसे उनकी वीआईपी खातिरदारी हो रही है। हैरानी की बात यह है कि इस व्यक्ति को अब तक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने मंत्रिमंडल में बनाये रखा है। यह वीडियो सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी का कहना है कि सत्येंद्र जैन को थैरेपी दी जा रही थी तो वहीं भाजपा ने सवाल पूछा है कि अरविंद केजरीवाल जी आप कहां छिप गए हैं?

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अमेरिकी सांसदों ने चीन के खतरों से निपटने के लिए व्यापक रणनीति बनाने का किया आग्रह
International अमेरिकी सांसदों ने चीन के खतरों से निपटने के लिए व्यापक रणनीति बनाने का किया आग्रह

अमेरिकी सांसदों ने चीन के खतरों से निपटने के लिए व्यापक रणनीति बनाने का किया आग्रह वाशिंगटन। रिपब्लिकन पार्टी के दो वरिष्ठ सीनेटर ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन से चीन द्वारा पेश किए जा रहे खतरे का मुकाबला करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार करने का बृहस्पतिवार को आग्रह किया। सीनेटर जिम रिस्क और मिट रॉमनी ने बृहस्पतिवार को बाइडन को लिखे एक पत्र में कहा, ‘‘हम आपके प्रशासन से आग्रह करते हैं कि वह चीन के संबंध में तुरंत एक व्यापक रणनीति तैयार करना शुरू करे।’’ इस पत्र की प्रति मीडिया के लिए भी जारी की गई। उन्होंने कहा कि अमेरिका को चीन की आक्रामकता को रोकने के लिए तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए। इसे भी पढ़ें: कैलिस ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका की टी20 लीग राष्ट्रीय टीम को जरूरी गहराई हासिल करने में मदद करेगी उन्होंने पत्र में कहा, ‘‘चीन की कार्रवाइयां कुछ चिंताजनक हैं.

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नीतीश बोले- बिहार में कानून का राज है, इसे बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
National नीतीश बोले- बिहार में कानून का राज है, इसे बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

नीतीश बोले- बिहार में कानून का राज है, इसे बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को कहा कि राज्य में कानून का राज स्थापित है, इसे बनाये रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बिहार में नवनियुक्त 10,459 पुलिस पदाधिकारियों/कर्मियों को नियुक्तिपत्र वितरण के लिए पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में कानून का राज स्थापित है और इसे बनाये रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कानून का राज कायम रखना सरकार का दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी देश के अलग-अलग राज्यों में एक लाख की आबादी पर पुलिसकर्मियों की 115 से ज्यादा सख्ंया है जिसे ध्यान में रखते हुए बिहार में भी इसे बढ़ाकर 160से 170 करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘इसी के अनुरूप हमें तेजी से नियुक्ति करनी है। हम लोग आवश्यकता के मुताबिक़ निरंतर पुलिस की क्षमता को भी बढ़ा रहे हैं।’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वर्ष 2010 में देश में एक लाख की आबादी पर 115 पुलिसकर्मी थे, बिहार में यह संख्या कम थी। उसके अनुसार एक लाख 52 हजार 232 और पुलिसकर्मियों की आवश्यकता थी। हमने गृह विभाग की हर बैठक में कहा कि भर्ती के काम में तेजी लाकर पुलिसकर्मियों की नियुक्ति करें जिसके बाद बिहार में अब तक एक लाख 8 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों की भर्ती हो चुकी है। एक लाख 52 हजार 232 पदों में से अभी भी 44 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती होनी है।’’ उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पुलिसकर्मियों की भर्ती में देर न करें और यथाशीघ्र उनकी भर्ती करायें। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013में राज्य सरकार ने पुलिस सेवा में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय किया जिसका परिणाम है कि आज बिहार पुलिस में 25 प्रतिशत महिलाएं सेवारत हैं।

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उच्च न्यायालय के स्थानांतरण के विरोध में वकीलों ने राज्य सरकार का पुतला फूंका
National उच्च न्यायालय के स्थानांतरण के विरोध में वकीलों ने राज्य सरकार का पुतला फूंका

उच्च न्यायालय के स्थानांतरण के विरोध में वकीलों ने राज्य सरकार का पुतला फूंका  उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से बाहर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को राज्य मंत्रिमंडल द्वारा सैद्धांतिक रूप से सहमति दिए जाने के विरोध में बृहस्पतिवार को वकीलों ने राज्य सरकार का पुतला फूंका। उच्च न्यायालय के प्रवेश द्वार पर विरोध प्रदर्शन करते हुए वकीलों ने सरकार को पहाड़ विरोधी बताते हुए उसके खिलाफ जमकर नारे लगाए। उच्च न्यायालय के स्थानांतरण के प्रस्ताव के विरोध में प्रदर्शनकारी वकीलों ने राष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक ज्ञापन भी सौंपा। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रभाकर जोशी ने कहा कि बार काउंसिल ने 16 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश से मामले पर एकतरफा निर्णय न लिये जाने की अपील की थी। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि इस मसले पर बार काउंसिल की बात नहीं सुनी गयी और मंत्रिमंडल में प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया। विरोध प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र में स्थित एकमात्र संस्थान को भी सरकार द्वारा बलपूर्वक छीना जा रहा है। उन्होंने कहा कि वकील राज्य सरकार के इस निर्णय के विरूद्ध विधिक लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। पूर्व विधायक और उच्च न्यायालय के वकील महेंद्र पाल ने कहा कि यह निर्णय पहाड़ से पलायन का मुख्य कारण बनेगा। उन्होंने कहा, ‘‘पलायन के कारण अब तक 1,700 गांव बंजर हो चुके हैं। 30 लाख लोग पहाड़ छोड चुके हैं। उच्च न्यायालय को पहाड़ से हटाने से पहाड़ों की स्थिति और खराब ही होगी।’’ पाल ने कहा कि उच्च न्यायालय को स्थानांतरित करने के लिए सरकार द्वारा दिए जा रहे कारण भी उचित नहीं हैं।

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पंजाब सरकार को कानून व्यवस्था संभालने के प्रति जल्द ही गंभीर होना होगा
Column पंजाब सरकार को कानून व्यवस्था संभालने के प्रति जल्द ही गंभीर होना होगा

पंजाब सरकार को कानून व्यवस्था संभालने के प्रति जल्द ही गंभीर होना होगा देश की कृषि एवं महापुरुषों की शांति भूमि राजनीतिक कारणों से हिंसा, आतंकवाद एवं नशे की भूमि बन गयी है। जबसे आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है, हिंसा, हथियारों एवं नशे की उर्वरा भूमि बनकर जीवन की शांति पर कहर ढहा रही है। राज्य में तेजी से पनप रही बंदूक एवं नशे की संस्कृति चिन्ता का सबब बन रही है। निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं और अधिकांश लोग नशे में डूब रहे हैं। हथियारों का खुला प्रदर्शन और खूनखराबा आम बात हो गयी है। इस प्रकार यह हथियारों की श्रृंखला, नशे का नंगा नाच, अमानवीय कृत्य अनेक सवाल पैदा कर रहे हैं। कुछ सवाल लाशों के साथ सो गये। कुछ समय को मालूम है, जो भविष्य में उद्घाटित होंगे। इसके पीछे किसका दिमाग और किसका हाथ है?

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मैनपुरी उपचुनाव में बहू डिंपल के पक्ष में प्रचार करेंगे शिवपाल यादव, सपा ने बनाया स्टार प्रचारक
National मैनपुरी उपचुनाव में बहू डिंपल के पक्ष में प्रचार करेंगे शिवपाल यादव, सपा ने बनाया स्टार प्रचारक

मैनपुरी उपचुनाव में बहू डिंपल के पक्ष में प्रचार करेंगे शिवपाल यादव, सपा ने बनाया स्टार प्रचारक समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच में रिश्ते सामान्य होते दिखाई दे रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि आज मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव के लिए समाजवादी पार्टी की ओर से जो स्टार प्रचारकों की सूची जारी की गई है। उसमें शिवपाल यादव का भी नाम है। आपको बता दें कि शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच में रिश्ते 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले खराब हो गए थे। इसके बाद शिवपाल यादव ने अपनी पार्टी बना ली थी। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों एक साथ जरूर हुए थे। लेकिन चुनावी नतीजों के बाद दोनों के बीच दूरियां साफ तौर पर दिखाई देने लगी थी। ऐसे में एक बार फिर से शिवपाल यादव को समाजवादी पार्टी ने स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया है।  इसे भी पढ़ें: मैनपुरी उप चुनाव के लिए डिंपल यादव ने दाखिल किया नामांकन, अखिलेश यादव भी रहे मौजूद

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उदयपुर घटना को लेकर राजस्थान की कानून व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में
National उदयपुर घटना को लेकर राजस्थान की कानून व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में

उदयपुर घटना को लेकर राजस्थान की कानून व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में राजस्थान की कानून व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि उदयपुर में रेलवे पटरी पर विस्फोट की घटना ने सबको हिला कर रख दिया है। हालांकि अब इस मामले की जांच का काम एनआईए को सौंप दिया गया है। देखना होगा कि क्या चीजें सामने निकल कर आती हैं। इस बीच, सोमवार सुबह NSG की टीम घटनास्थल पर पहुंची और गहनता से पूरे इलाके का निरीक्षण किया। जहां तक इस घटनाक्रम की बात है तो हम आपको बता दें कि असरवा-उदयपुर एक्सप्रेस ट्रेन के जावर माइंस थाना क्षेत्र से गुजरने से कुछ घंटे पहले रविवार को उदयपुर में रेलवे पटरी पर विस्फोट हो गया। बताया जा रहा है कि केवड़ा की नाल के पास ओढा रेलवे पुल पर पटरियों को नुकसान पहुंचाने के लिए खनन विस्फोटकों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि स्थानीय लोगों की सतर्कता के चलते एक बड़ी घटना टल गई।

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उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से मिलीं मुलायम की छोटी बहू अपर्णा : अटकलें तेज
National उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से मिलीं मुलायम की छोटी बहू अपर्णा : अटकलें तेज

उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से मिलीं मुलायम की छोटी बहू अपर्णा : अटकलें तेज समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव ने बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश ईकाई के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी से लखनऊ में मुलाकात की। अपर्णा ने इस साल के शुरू में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ऐन पहले भाजपा का दामन थामा था। अपर्णा ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से मुलाकात की तस्वीरें अपने टि्वटर हैंडल पर साझा की हैं।

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अमेरिका मध्यावधि चुनाव: डेमोक्रेटिक पार्टी के पांच भारतीय-अमेरिकी सांसदों की जीत
International अमेरिका मध्यावधि चुनाव: डेमोक्रेटिक पार्टी के पांच भारतीय-अमेरिकी सांसदों की जीत

अमेरिका मध्यावधि चुनाव: डेमोक्रेटिक पार्टी के पांच भारतीय-अमेरिकी सांसदों की जीत अमेरिकी की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी के पांच भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और एमी बेरा ने मध्यावधि चुनाव में जीत दर्ज कर अमेरिकी की प्रतिनिधि सभा में अपनी जगह पक्की कर ली है। कई भारतीय-अमेरिकियों ने राज्य विधायिका चुनाव में भी जीत दर्ज की। भारतीय-अमेरिकी उद्यमी एवं राजनेता श्री थानेदार मिशिगन से कांग्रेस के लिए चुनाव जीतने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी बने। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार मार्टेल बिविंग्स को मात दी। थानेदार (67) अभी मिशिगन के तीसरे जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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मुख्तार अंसारी का साला आतिफ रजा सात दिन की ईडी हिरासत में
National मुख्तार अंसारी का साला आतिफ रजा सात दिन की ईडी हिरासत में

मुख्तार अंसारी का साला आतिफ रजा सात दिन की ईडी हिरासत में प्रयागराज की जिला अदालत ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को धनशोधन के मामले में माफिया मुख्तार अंसारी के साले आतिफ रजा उर्फ शरजील रजा को सात दिन की हिरासत में लेने की अनुमति प्रदान की। जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) गुलाब चंद्र अग्रहरि ने बताया कि धनशोधन निवारण अधिनियम के मामले में ईडी ने अभियुक्त आतिफ रजा उर्फ शरजील रजा को जिला न्यायाधीश संतोष राय की अदालत में मंगलवार को पेश किया। उन्होंने बताया कि ईडी ने 167 (2) सीआरपीसी के तहत प्रार्थना पत्र देकर आतिफ रजा को 14 दिन के लिए हिरासत में दिए जाने की गुजारिश की। अग्रहरि ने बताया कि बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि यदि आतिफ रजा को ईडी की हिरासत में दिया जाता है तो उनकी मेडिकल सुविधा का ध्यान दिया जाए क्योंकि आतिफ कैंसर से पीड़ित है। उन्होंने बताया कि न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह आदेश पारित किया कि अभियुक्त को ईडी की हिरासत में आठ नवंबर से 15 नवंबर तक दिया जाए। उनके अनुसार अदालत ने कहा कि हिरासत में लेने से पहले ईडी अभियुक्त की चिकित्सा जांच कराएगा और अभियुक्त अपने अधिवक्ता से विधि परामर्श ले सकता है। अग्रहरि के अनुसार अदालत ने यह भी कहा कि लेकिन अभियुक्त के अधिवक्ता ईडी की कार्रवाई में कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे। उल्लेखऩीय है कि इससे पूर्व ईडी ने मुख्तार अंसारी के बेटे और मऊ से विधायक अब्बास अंसारी को शुक्रवार को हिरासत में लिया था और अदालत ने उसकी सात दिन की ईडी की हिरासत मंजूर की थी। बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी के खिलाफ दर्ज धनशोधन मामले में अब्बास अंसारी से पूछताछ के लिए उसे नोटिस जारी किया गया था और वह शुक्रवार को ईडी कार्यालय पहुंचा जहां देर रात उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की वर्तमान प्रणाली से कानून मंत्री क्यों हैं नाखुश, क्या अब जजों की नियुक्ति सरकार करेगी?
Mri सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की वर्तमान प्रणाली से कानून मंत्री क्यों हैं नाखुश, क्या अब जजों की नियुक्ति सरकार करेगी?

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की वर्तमान प्रणाली से कानून मंत्री क्यों हैं नाखुश, क्या अब जजों की नियुक्ति सरकार करेगी?

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प्रिंस एंड्रयू और प्रिंस हैरी कैसे संभाल सकते हैं जिम्मेदारी, कानून कैसे बदल सकता है
International प्रिंस एंड्रयू और प्रिंस हैरी कैसे संभाल सकते हैं जिम्मेदारी, कानून कैसे बदल सकता है

प्रिंस एंड्रयू और प्रिंस हैरी कैसे संभाल सकते हैं जिम्मेदारी, कानून कैसे बदल सकता है ब्रिटेन के संविधान के केंद्र में एक मौलिक सिद्धांत यह है कि ताज कभी नहीं मरता। एक सम्राट की मृत्यु पर, सिंहासन पर उसका उत्तराधिकारी तत्काल आसीन हो जाता है। यह सहज संक्रमण सुनिश्चित करता है कि सरकार (जो ताज के नाम पर चलती है) काफी हद तक अप्रभावित रहती है। जबकि राजशाही को दलीय राजनीति से बाहर रहने की आवश्यकता होती है, सरकार और संसद द्वारा कई निर्णय लिए जाते हैं जिनके लिए सम्राट की औपचारिक स्वीकृति की आवश्यकता होती है। नए प्रधान मंत्री की नियुक्ति, नए कानून को शाही स्वीकृति देना और अंतर्राष्ट्रीय संधियों की पुष्टि करना ऐसे ही कुछ काम हैं। इनमें से कुछ मामलों में सम्राट के व्यक्तिगत हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है। 15 देशों के राष्ट्र प्रमुख होने के नाते, सम्राट को विदेश यात्राभी करनी होती है। और, चूंकि सम्राट मनुष्य होते हैं, वे समय-समय पर बीमार पड़ सकते हैं। तो क्या होता है जब संवैधानिक कर्तव्यों को पूरा करने के लिए सम्राट की आवश्यकता होती है, लेकिन व्यक्तिगत रूप से वह मौजूद नहीं हो पाते?

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राजद्रोह कानून पर रोक जारी रहेगी, जनवरी के दूसरे हफ्ते में सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
National राजद्रोह कानून पर रोक जारी रहेगी, जनवरी के दूसरे हफ्ते में सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

राजद्रोह कानून पर रोक जारी रहेगी, जनवरी के दूसरे हफ्ते में सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सरकार संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में भारतीय दंड संहिता की धारा 124 (ए) के तहत देशद्रोह कानून में बदलाव ला सकती है। शीर्ष अदालत देशद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। शीर्ष अदालत ने देशद्रोह कानून को चुनौती देने वाली कुछ याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस भी जारी किया। भारत के मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित के नेतृत्व वाली शीर्ष अदालत ने जनवरी के दूसरे सप्ताह में सुनवाई के लिए देशद्रोह कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले मामलों को पोस्ट किया।इसे भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, रेप मामलों में बैन किया टू फिंगर टेस्टभारतीय दंड संहिता की धारा 124ए देशद्रोह के अपराध को अपराध बनाती है। इससे पहले मई में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जब तक सरकार इसकी समीक्षा नहीं करती और जेल में बंद लोग जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं, तब तक विवादास्पद राजद्रोह कानून पर रोक रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए, जो देशद्रोह के अपराध को अपराध बनाती है, को तब तक स्थगित रखा जाए जब तक कि सरकार द्वारा कानून की समीक्षा करने की कवायद पूरी नहीं हो जाती।इसे भी पढ़ें: महिलाओं के प्रजनन अधिकारों पर उम्र की पाबंदी के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई, केंद्र को दिया नोटिसभारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और हेमा कोहली की पीठ ने केंद्र सरकार और राज्यों से धारा 124 ए के तहत कोई भी मामला दर्ज नहीं करने को कहा। पीठ ने कहा कि अगर भविष्य में ऐसे मामले दर्ज किए जाते हैं, तो पक्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र हैं और अदालत को इसका तेजी से निपटान करना होगा।

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उत्तर प्रदेश के दादरी क्षेत्र में महिला का शव बरामद, देवर को किया गया गिरफ्तार
National उत्तर प्रदेश के दादरी क्षेत्र में महिला का शव बरामद, देवर को किया गया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के दादरी क्षेत्र में महिला का शव बरामद, देवर को किया गया गिरफ्तार नोएडा (उप्र)। गौतमबुद्ध नगर जिले के दादरी थाना क्षेत्र में 18 अक्टूबर को खेत से एक महिला का शव मिलने के मामले में पुलिस ने उसके देवर को गिरफ्तार किया है। दादरी थाना प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार सिंह ने बताया कि पल्ला गांव निवासी उमेश सिंह का अपनी पत्नी आरती के साथ किसी बात को लेकर विवाद हो गया था, जिसके बाद आरती दादरी में रहने वाले अपने देवर राजू के पास पहुंची। इसे भी पढ़ें: अभिषेक बच्चन, फरहान अख्तर, मनीष पॉल 2023 के आईफा पुरस्कार समारोह के प्रस्तोता होंगे उन्होंने बताया कि आरती ने राजू को पहले डेढ़ लाख रुपए उधार दिए थे, लेकिन जब उसने राजू से पैसे वापस मांगे, तो उसने उसकी हत्या कर दी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। सिंह ने बताया कि राजू को अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

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प्रधान न्यायाधीश ने विधि स्नातकों से मानव जाति के लिए करुणा दिखाने की सलाह दी
National प्रधान न्यायाधीश ने विधि स्नातकों से मानव जाति के लिए करुणा दिखाने की सलाह दी

प्रधान न्यायाधीश ने विधि स्नातकों से मानव जाति के लिए करुणा दिखाने की सलाह दी भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) उदय उमेश ललित ने रविवार को विधि संस्थानों से पढ़ाई करने वाले छात्रों को हर सुझाव पर ध्यान देने और मानव जाति एवं समाज के लिए करुणा का भाव रखने की सलाह दी। पश्चिम बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिकल साइंसेज (डब्ल्यूबीएनयूजेएस) के 14वें दीक्षांत समारोह को सम्बोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि किसी व्यक्ति का क्षमता निर्माण कभी नहीं रुकता है और व्यक्ति मृत्युपर्यंत सीखता रहता है। सीजेआई इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं। न्यायमूर्ति ललित ने विधि स्नातकों से कहा, ‘‘हर सुझाव पर ध्यान दें, यहीं से आपको बड़ी प्रेरणा मिलेगी।’’ उन्होंने छात्रों को अध्ययन जारी रखने और अपने व्यक्तित्व में नये-नये आयाम जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। सीजेआई ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में क्षमता निर्माण के गुण और मानव जाति के लिए करुणा का भाव एक व्यक्ति को किसी भी समस्या का समाधान खोजने में कभी असफल नहीं होने देता। उन्होंने कहा कि एक वकील के रूप में कोई भी कानून का छात्र बनना कभी नहीं छोड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि एक पेशेवर, एक शिक्षाविद और एक न्यायाधीश के रूप में, हर गुजरते दिन और साल व्यक्ति सीखता रहता है, लेकिन उसकी नींव तो विधि संस्थान ही होते हैं। न्यायमूर्ति ललित ने कहा कि विश्वविद्यालय से बाहर आने और दुनिया में कदम रखने के बाद विधि स्नातकों को समाज से जितना मिला है, उससे ज्यादा वापस देने का प्रयास करना चाहिए। बांग्लादेश के प्रधान न्यायाधीश हसन फोएज़ सिद्दीकी इस दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि थे। न्यायमूर्ति सिद्दीकी ने अपने संबोधन में कहा कि विधि स्नातक कानून से लेकर सिविल सेवा तक विभिन्न पेशों का चयन कर सकते हैं और उन्हें हर पेशा जुनून, गरिमा और सम्मान की भावना के साथ करना चाहिए। दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तीर्ण विद्यार्थियों को बधाई दी और इस दिन को उनके लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए वकीलों को आगे आना चाहिए। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), बंबई के निदेशक प्रोफेसर शुभाशीष चौधरी ने दीक्षांत भाषण दिया। डब्ल्यूबीएनयूजेएस के कुलपति निर्मल कांति चक्रवर्ती ने कहा कि 400 छात्रों ने अपनी डिग्री प्राप्त की, जिनमें से 270 विद्यार्थी समारोह में मौजूद थे।

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मौलाना साएम मेहंदी फिर बने शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष
National मौलाना साएम मेहंदी फिर बने शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष

मौलाना साएम मेहंदी फिर बने शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना साएम मेहंदी एक बार फिर शिया मुसलमानों के प्रमुख संगठन माने जाने वाले ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। बोर्ड के वरिष्ठ पदाधिकारी मौलाना एजाज अतहर ने पीटीआई- को बताया कि शनिवार को बोर्ड कार्यकारिणी की एक अहम बैठक में मौलाना मेहंदी को लगातार दूसरी बार बोर्ड का अध्यक्ष चुना गया। उन्होंने बताया कि बैठक में कई मसलों पर विचार-विमर्श भी किया गया। बैठक के दौरान समान नागरिक संहिता का विरोध करते हुए कहा गया कि एक बहुभाषी और बहु सांस्कृतिक देश में ऐसा कोई भी कदम बिल्कुल भी सही नहीं होगा।

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विदेश मंत्री बिलावल ने यूएई से पत्रकार अरशद शरीफ का निष्कासन करने को नहीं कहा था: पाकिस्तान
International विदेश मंत्री बिलावल ने यूएई से पत्रकार अरशद शरीफ का निष्कासन करने को नहीं कहा था: पाकिस्तान

विदेश मंत्री बिलावल ने यूएई से पत्रकार अरशद शरीफ का निष्कासन करने को नहीं कहा था: पाकिस्तान इस्लामाबाद। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इन खबरों को ‘‘निराधार और मनगढ़ंत’’ बताया कि विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अधिकारियों को पत्रकार अरशद शरीफ को निष्कासित करने के लिए एक पत्र लिखा था। शरीफ (49) रविवार रात केन्या में एक पुलिस चौकी पर गोलीबारी में मारे गये थे। केन्याई पुलिस ने बाद में कहा था कि यह एक बच्चे के अपहरण के मामले में इसी तरह की कार की तलाशी के दौरान ‘‘गलत पहचान’’ का मामला था। इसे भी पढ़ें: 2017 चुनाव में हिमाचल में चला था PM मोदी का जादू, भाजपा ने हासिल की थी शानदार जीत अरशद शरीफ की मौत से पाकिस्तान में राजनीतिक तूफान उठा खड़ हो गया है। नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता असीम इफ्तिखार अहमद ने अपनी साप्ताहिक ब्रीफिंग में इन खबरों को पूरी तरह से ‘निराधार और मनगढ़ंत’ करार दिया और कहा कि सच्चाई को सामने लाने के लिए पत्रकार की हत्या की जांच जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें केन्याई और पाकिस्तानी जांच समितियों की जांच रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए।

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विवाह एक मुकदमा (व्यंग्य)
Literaturearticles विवाह एक मुकदमा (व्यंग्य)

विवाह एक मुकदमा (व्यंग्य) ज़िंदगी में, त्योहारों के वार्षिक मौसम में, वैवाहिक जीवन का सबसे बड़ा त्यौहार आता है करवा चौथ का व्रत। शादी शुदा ज़िंदगी की कैसी कैसी अनसुलझी गुत्थियां समाज के अनाम कोनों में पड़ी रहती हैं इस बारे करवा चौथ का व्रत कुछ नहीं कहता। त्योहार संपन्न होने के बाद इनके सुप्रभाव और कुप्रभाव पर चर्चा के साथ जीवन सामान्य हो जाता है लेकिन वैवाहिक जीवन के मुकदमे बरसों चलते रहते हैं क्यूंकि बरसों चलाने होते हैं।   

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